आतंकवादी Yasin Malik ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में भूख हड़ताल की समाप्त

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख आतंकवादी यासीन मलिक (Yasin Malik) ने जेल अधिकारियों के अनुसार अपनी भूंख हड़ताल समाप्त कर दी है. बता दें की, तिहाड़ जेल की जेल नंबर 7 में बंद यासीन मलिक ने आरोप लगाया था कि उसके मामले की ठीक से जांच नहीं हो रही है.

इसलिए समाप्त की भूख हड़ताल

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, यासीन मलिक ने डीजी कारागार संदीप गोयल के अनुरोध पर अपनी भूख हड़ताल को दो महीने की अवधि के लिए टाल दिया है. जेल अधिकारियों ने कहा, “मलिक को 26 जुलाई को डॉ राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह 29 जुलाई को वापस जेल में था.”

बता दें की, यासीन मालिक (Yasin Malik) को 2019 में जेकेएलएफ पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था. मालिक  को इस साल 19 मई को एनआईए अदालत ने आतंकी फंडिंग मामलों में दोषी ठहराया था. 25 मई को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

एनआईए कोर्ट ने मलिक को सजा सुनाते हुए ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया था. इस साल 15 जुलाई को, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बहन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद ने 8 दिसंबर, 1989 को जेकेएलएफ आतंकवादियों द्वारा उसके अपहरण के संबंध में मलिक की पहचान की थी.

इन मामलों में आरोपी है मलिक

अधिकारिक जानकारी की माने तो, यासीन मलिक (Yasin Malik) को तब गिरफ्तार किया गया था जब, उसने और उसके साथियों ने रुबैया सईद का अपहरण कर लिया था. बता दें की, रुबैया का 8 दिसंबर, 1989 को श्रीनगर में अपहरण कर लिया गया था. और पांच दिनों के बाद 13 दिसंबर को कैद से मुक्त कर दिया गया था.

जब केंद्र में तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने बदले में पांच आतंकवादियों को रिहा कर दिया था. जिसमें यासीन मलिक भी था.  इसके अलावा यासीन मलिक पर गंभीर आरोप लगें हैं. जिसमें से एक यह है की, मलिक को जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायु सेना (IAF) के चार अधिकारियों की हत्या के मामले में भी आरोपों का सामना करना पड़ रहा है.

इसके अलावा 1987 के जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव के दौरान यासीन मलिक ने मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट जॉइन कर लिया था. इस संगठन ने कांग्रेस और नैशनल कॉन्फ्रेंस के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में जमकर प्रचार किया था. यासीन मलिक को एक खूंखार आतंकवादी माना जाता है.

1988 में अपनाया था आतंकवाद का रास्ता

जानकारी के मुताबिक, 1988 में यासीन मलिक ने आतंक का रास्ता अपना लिया था. यासीन ने पाक अधिकृत कश्मीर (POK) जाकर आतंक की ट्रेनिंग ली और इसके बाद कश्मीर (Kashmir) लौटकर जेकेएलएफ का एरिया कमांडर बन गए थे. 1989 तक यासीन मलिक जेकेएलएफ (JKLF) का एक प्रमुख चेहरा बन गया था.

यासीन मलिक ने हाजी नाम का एक गुट बनाया था. अशफाक वानी, हामिद शेख और जावेद अहमद मीर नाम के तीन आतंकियों को शामिल किया था. वैसे बता दें की, कश्मीर की आजादी की बात कहने वाले यासीन मलिक को जमानत के पांच साल बाद 1999 में फिर गिरफ्तार किया गया था. जिस वक़्त यासीन को गिरफ्तार किया गया था उस वक़्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी.

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