पोलैंड ने जर्मनी से WWII में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए 1.3 ट्रिलियन डॉलर की मांग की

WWII: पोलैंड के विदेश मंत्री ज़बिग्न्यू राउ ने बर्लिन के शीर्ष राजनयिक की यात्रा से पहले सोमवार को जर्मनी के लिए एक आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए.  बता दें की,  द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के दौरान नाजी जर्मनों (Germany) के कब्जे से हुए नुकसान के लिए करीब 1300 अरब अमेरिकी डॉलर की क्षतिपूर्ति का अनुरोध किया गया.

WWII में हुए नुकसान के लिए पोलैंड ने जर्मनी से भरपाई के लिए कहा

Aljazeera से मिली जानकारी के मुताबिक, पोलैंड के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार जर्मनी ने कहा है कि अब युद्ध से जुड़े सभी वित्तीय दावों का निपटारा कर दिया गया है. बता दें की, राउ ने वारसा में जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक के साथ बैठक की पूर्व संध्या पर इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं.

पोलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लुकाज़ जैसीना ने संवाददाताओं से कहा कि राउ मंगलवार को वारसॉ की अपनी यात्रा के दौरान अपनी जर्मन समकक्ष एनालेना बारबॉक के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे.

युद्ध के दौरान तीन मिलियन पोलिश यहूदियों (Polish Jews) सहित लगभग छह मिलियन लोग मारे गए थे और 1944 के विद्रोह के बाद वारसॉ को पछाड़ दिया गया था. जिसमें लगभग 200,000 नागरिक मारे गए थे.

एक तरफ जर्मनी का कहना है की, उसने सभी देशो को उचित रूप से मुआवजे दे दिया है लेकिन पोलैंड के सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कानून और न्याय (PIS) का कहना है कि समझौता अमान्य है क्योंकि पोलैंड उचित मुआवजे पर बातचीत करने में उस वक़्त असमर्थ  था.

पोलैंड की सरकार ने नुकसान पर पेश की रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक,  युद्ध की 83वीं वर्षगांठ पर एक सितंबर को पोलैंड की सरकार ने नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. जर्मनी का कहना है की, मुआवजे की माँग 2015 में फिर से पोलैंड ने शुरू कर दी है जो की पूरी तरह से गलत है.

अगर हम बात करे WWI की तो, जर्मनी को गिल्टी ऑफ़ अग्रेशन कहा गया था. जिसका मतलब है की वर्ल्ड वॉर की शुरुवात जर्मनी की वजह से हुई थी. उस वक़्त जर्मनी ने अन्य देशों के दवाब में 33 बिलियन डॉलर मुआवजे के रूप में वर्ल्ड वॉर में सम्मिलित देशों को दिए थे. जर्मनी ने इसके साथ अपनी ज़मीन भी देशो को मुआवजे के रूप में दी थी.

मुआवजे में जर्मनी ने दिया था कोयला

फ्रांस,डेनमार्क जैसे देशों को जर्मनी ने अपनी ज़मीन दी थी. फ्रांस और इटली को तो जर्मनी ने कोयला (Coal) तक मुआवजे के रूप में कई सालों तक के लिए  दिया था. एक लाख सैनिक, 25 शिप्स को ही इस्तमाल करने की जर्मनी (Germany) को इजाजत दी गई थी. प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी को इतना नुकसान उठाना पड़ा था लेकिन उसके बावजूद भी जर्मनी समझौते के लिए नहीं झुका था.

जर्मनी के लिए उस वक़्त एक सार वैली बहुत ख़ास थी जो भी उसको मुआवजे के रूप में गवानी पड़ी थी. जानकार ऐसा मानते हैं की दोनों वर्ल्ड वार का ज़िम्मेदार कहीं हद तक जर्मनी है. प्रथम वर्ल्ड वॉर के दौरान  यूरोप में दो ग्रुप बने थे. जो उस वक़्त एक दुसरे की जान लेने को आतुर थे. बताया जाता है की पूरा यूरोप इन दो गुटों में बट गया था.

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