September 26, 2022
World Bank ने यूक्रेन युद्ध को बताया विकाशील देशों में मुद्रास्फीति का प्रमुख कारण

World Bank ने यूक्रेन युद्ध को बताया विकाशील देशों में मुद्रास्फीति का प्रमुख कारण

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विश्व बैंक (World Bank) का कहना है की रूस-यूक्रेन युद्ध से विकासशील देशों को भारी नुकसान हो रहा है. इस युद्ध के कारण खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव पड़ा है.

युद्ध के चलते विश्व बैंक (World Bank)  ने कहा कि रिकॉर्ड उच्च खाद्य कीमतों ने एक वैश्विक संकट पैदा कर दिया है जो लाखों लोगों को अत्यधिक गरीबी, भूख और कुपोषण को बढ़ावा दे रहा है.

युद्ध के चलते बढ़ रहा संकट

WION से मिली जानकारी के मुताबिक, विश्व बैंक (World Bank) की एक रिपोर्ट ने सोमवार को पुष्टि की कि कई विकासशील देश वर्तमान में अपंग खाद्य मुद्रास्फीति का सामना कर रहे हैं. और इसके परिणामस्वरूप अमीर देशों में कीमतों में वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्थिति और भी खराब हो सकती है.

बता दें की, इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में खाद्य बिल उनके वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक प्रतिशत बढ़ सकता है. विश्व बैंक का कहना है की,

“उच्च मुद्रास्फीति वाले उच्च आय वाले देशों की हिस्सेदारी में भी तेजी से वृद्धि हुई है. लगभग 78.6% उच्च खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति का अनुभव कर रहे हैं. सबसे अधिक प्रभावित देश अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण एशिया, यूरोप और मध्य एशिया में हैं.”

इसके अलावा विशव बैंक का कहना है की, “यूक्रेन में युद्ध, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, और कोविड -19 महामारी के निरंतर आर्थिक परिणाम विकास लाभ के वर्षों को प्रभावित कर रहें हैं.” बता दें की, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है. क्योंकि वे अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा उच्च आय वाले देशों के लोगों की तुलना में भोजन पर खर्च करते हैं.

World Bank का आंकड़ा यह कहता है

बता दें की, विश्व बैंक (World Bank) के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति का सबसे बुरा शिकार लेबनान था जो बेरूत में विस्फोट के बाद से और ज्यादा आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. वैसे वर्तमान में, खाद्य और ईंधन संकट के बीच देश की सामान्य मुद्रास्फीति दर 150% से ऊपर बनी हुई है.

वैसे बता दें की हालही में संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के सामने एक रिपोर्ट साझा की थी. जिसमें बताया था की, महामारी के कारण उपजे वैश्विक संकट के चलते 2021 में करीब 7.7 करोड़ लोग गरीबी के गंभीर स्तर पर पहुंच गए थे.

रिपोर्ट का अनुमान है कि 2023 के अंत तक भी 5 में से एक विकासशील देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी वापस 2019 के स्तर पर नहीं पहुंच पाएगी. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट  की माने तो, कई विकासशील देशों के लिए कर्ज के बढ़ते बोझ और उसके ब्याज ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है.

पडोसी देशों में है बुरे हालात

अगर सिर्फ एशिया की ही बात की जाए तो लगभग सभी देश महंगाई की मार झेल रहें है. जिसमें श्रीलंका में लोगों के गुस्से की सारी हदे पार हो गई. उधर चीन की भी अर्थव्यस्था डामाडोल  ही है. चीन में तो हालात यह हो गए हैं की चीनी सरकार को बैंको के आगे सैन्य टैंक लगाने पड़ रहे हैं.

कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध ने अंतराष्ट्रीय बाज़ार पर भी असर डाला है. भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी क़र्ज़ में डूबा हुआ है. हाल यह है की अब कोई पाकिस्तान को क़र्ज़ देने को भी नहीं तैयार है.

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