September 29, 2022
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यमन अरब दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है , जो गृह युद्ध के कारण तबाह हो गया है। आज हम इसका कारण क्या है और कौन इसके पीछे है यह सब जानने की कोशिश करते है |


यमन मध्यपूर्व एशिया का एक देश है, जो अरब प्रायद्वीप में दक्षिण पश्चिम में स्थित है। 2 करोड़ वाली आबादी वाले देश यमन की सीमा उत्तर में सऊदी अरब, पश्चिम में लाल सागर, दक्षिण में अरब सागर और अदन की खाड़ी और पूर्व में ओमान से मिलती है। यमन की भौगोलिक सीमा में लगभग 200 से ज्यादा द्वीप भी शामिल हैं, जिनमें सोकोत्रा द्वीप सबसे बड़ा है।

शुरुआत-

2010 में जब लोकतंत्र की मांग के लिए सरकार विरोधी प्रदर्शन अफ्रीका के उत्तरी भाग में स्थित ट्यूनीसिया से शुरू होकर अन्य अरब देशों में फ़ैल गया तो इसे अरब स्प्रिंग नाम दिया गया क्योकि इसके कारण बहुत से तानाशाहो को अपनी सत्ता छोड़नी पड़ी | धीमे – धीमे यह लहर यमन में भी पहुँच गयी |

यमन में अली अब्दुल्ला सालेह 1990 से 2011 तक लगातार शासन कर रहे थे लोग उनकी नीतियों और तानाशाही के खिलाफ एक जुट हो गए जिसके कारण उनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और राष्ट्रपति पद उपराष्ट्रपति अब्दुर्रब मंसूर हादी को सौंपना पड़ा |
राष्ट्रपति के बनने के बाद अब्दुर्रब मंसूर हादी को कई समस्याओं से निपटने के लिए संघर्ष पड़ा जिसमें जिहादियों द्वारा किए गए हमले , यमन के दक्षिण भाग में एक अलगाववादी आंदोलन, पूर्व राष्ट्रपति सालेह के प्रति सुरक्षा कर्मियों की निरंतर निष्ठा के साथ ही साथ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खाद्य असुरक्षा शामिल थी |

हूती आंदोलन (औपचारिक रूप से अंसार अल्लाह के नाम से जाना जाता है), जिसने पिछले दशक के दौरान यमन के जैदी शिया मुस्लिम अल्पसंख्यक को पिछले राष्ट्रपति सालेह के खिलाफ विद्रोहियों की एक श्रृंखला खड़ी की थी , उन्होंने नए राष्ट्रपति की कमजोरी का फायदा उठाते हुए साडा प्रांत और पड़ोस के उत्तरी क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया | सत्ता परिवर्तन के बाद भी नयी सरकार से परेशान कई सामान्य यमनियों (जिनमें सुन्नी लोग भी शामिल) ने भी हूती विद्रोहियों को अपना समर्थन किया और 2014 के अंत में और 2015 की शुरुआत में विद्रोहियों ने धीरे-धीरे राजधानी साना पर अपना कब्जा कर लिया।

पूर्व राष्ट्रपति सालेह के प्रति निष्ठा रखने वाले हूतियों और सुरक्षा बलों ने मिलकर पूरे देश पर नियंत्रण करने का प्रयास किय जिसके कारण राष्ट्रपति हादी को मार्च 2015 में विदेश भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अपने पड़ोस में एक शिया शक्ति के उभरने ने सऊदी अरब और उसके सहयोगी सुन्नी देश चिंतित हो गए क्योंकि उनका मानना था की हूती विद्रोहियों को शिया देश ईरान से सैन्य मदद मिल रही है | सऊदी अरब समेत अभी मुस्लिम देश ईरान को 1979 की ईरानी क्रांति से अपना दुश्मन मानते है |
यमन में ईरान के प्रभाव को समाप्त करने और अब्दुर्रब मंसूर हादी की सरकार को फिर से बहाल करने के उद्देश्य से सऊदी और उसके सहयोगी सुन्नी मुस्लिम देशों ने 2015 में यमन पर हवाई हमले शुरू किया। सऊदी का मानना था की यह हवाई अभियान कुछ हफ़्तों में समाप्त हो जायेगा और यमन से हूती विद्रोहियों को उखाड़ फेक दिया जायेगा |
सऊदी और उसके सहयोगियों के इस हवाई अभियान में उनको अमेरिका , फ्रांस और इंग्लैंड से हथियार और ख़ुफ़िया जानकारियां प्राप्त हुयी |

वर्तमान स्थिति

लगातार 5 सालों से हूती विद्रोहियों से लड़ने के बाद भी सऊदी और सहयोगी देशों को कुछ छोटी सफलता के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है | 2017 में हूती विद्रोहियों ने सऊदी की राजधानी रियाद पर भी राकेट दागे इसके अलावा वे सऊदी के तेल कारखानों पर भी हमला करते रहते है | अपनी असफलता और ईरान के गल्फ देशों पर बढ़ते प्रभाव से सऊदी और उसके सहयोगी परेशां है जिसके कारण ही उन्होंने 2017 में क़तर से अपने सारे सम्बन्ध तोड़ लिया था जो इसी साल फिर से बहाल हुए है |
हवाई हमले और लगातार चल रहे युद्ध के कारण यमन आज दुनिया के सबसे गरीब देशों में गिना जाता है | जहां हर दूसरा बच्चा कुपोषित है और हजारों लोग हर साल हवाई हमले से या फिर भूख से मर जाते है | संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन में मानवाधिकार और भुखमरी के हालात दुनिया में सबसे बत्तर होते जा रहे है | कुछ समय पहले ही हुतियों और सऊदी सरकार के बीच युद्धविराम की घोषणा हुयी है | देखते है ये कब तक चलता है |

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