Ukraine: यूक्रेन यौन हिंसा और तस्करी संकट का कर रहा सामना, संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि ने किया आगाह

यूक्रेनी(Ukraine) और रूसी(Russia) सैनिक प्रमुख औद्योगिक शहर सिविएरोडोनेट्सक के नियंत्रण के लिए सड़क-दर-सड़क लड़ रहे हैं, यहां तक ​​​​कि संयुक्त राष्ट्र(United Nations) ने चेतावनी दी है कि युद्ध “मानव तस्करी संकट” पैदा कर रहा है. बता दें की, सशस्त्र हिंसक संघर्ष में यौन हिंसा के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र(United Nations) महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन(Pramila Patten)  ने सोमवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को आगाह किया है कि यूक्रेन(Ukraine) में रूसी(Russia) सैन्य बलों द्वारा यौन हिंसा के आरोप बढ़ते जा रहे हैं.

यौन हिंसा पर क्या कहा प्रमिला पैटन ने

यूक्रेन(Ukraine) में यौन हिंसा, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ, प्रचलित और कम रिपोर्ट की गई है, और युद्धग्रस्त देश में मानवीय संकट मानव तस्करी संकट में बदल रहा है, संघर्ष में यौन हिंसा के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत प्रमिला पैटन(Pamila Patten) ने कहा, “बहुत बार हिंसक संघर्ष परिस्थितियों में महिलाओं व लड़कियों की ज़रूरतों को दरकिनार किया गया है और उन्हें फिर बाद में ही सोचा गया है.”विशेष प्रतिनिधि ने सचेत किया कि हस्ताक्षरित नए फ़्रेमवर्क में इस स्पष्ट रूप से एक प्राथमिकता तय किया गया है.

विशेष प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद के अनेक प्रस्तावों का उल्लेख किया, जिनमें यौन हिंसा को युद्ध की एक हथियार के रूप में इस्तेमाल में लाये जाने पर पाबन्दी है.उन्होंने ध्यान दिलाया कि पिछले एक दशक में परिषद द्वारा इसकी रोकथाम के लिये व्यक्त किये गए संकल्पों और दुनिया भर में अनेक महिलाओं के लिये मौजूदा हालात में खाई बढ़ती जा रही है. 3 जून तक, संयुक्त राष्ट्र(United Nations) मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की निगरानी टीम ने यूक्रेन(Ukraine) में हिंसक संघर्ष सम्बन्धी यौन हिंसा के कथित रूप से 124 मामलों की जानकारी मिली है.

कैसे होनी चाहिये तत्काल कार्रवाई

संयुक्त राष्ट्र(United Nations) महासचिव की विशेष प्रतिनिधि ने मानव कल्याण पक्षकारों से यौन व लिंग-आधारित हिंसा के पीड़ितों के लिये समर्थन को प्राथमिकता दिये जाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि इसे मानवीय राहत अभियान में जीवनरक्षक प्रयास के तौर पर लिया जाना होगा और इसके क्रियान्वयन में देरी से बचा जाना होगा. प्रमिला पैटन(Pamila Patten) ने आगाह किया कि एक युद्ध क्षेत्र में सटीक आँकड़े तैयार करने का माहौल मिल पाना सम्भव नहीं है, और पुख़्ता आँकड़ों व डेटा की अगर प्रतीक्षा की गई, तो इसमें हमेशा देरी होगी.

विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने ‘सहयोग के फ़्रेमवर्क’ में प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे यूक्रेन(Ukraine) में यौन हिंसा(Sexual assault) का मुक़ाबला और उसकी रोकथाम के लिये सहयोग को मज़बूती प्रदान करना सम्भव होगा. इसके ज़रिये, यूक्रेन छोड़कर भाग रहे लोगों के मानव तस्करों के चंगुल में फँस जाने के जोखिम को कम करने और पीड़ितों को सेवाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है. मगर, उन्होंने सचेत किया कि देश छोड़कर जाने वाले 68 लाख लोगों के लिये संरक्षण सम्बन्धी चुनौतियाँ अभूतपूर्व हैं. देश में हिंसक संघर्ष शुरू होने के बाद से ही यौन शोषण व वेश्यावृत्ति के लिये व्यक्तियों की तस्करी किये जाने का जोखिम बढ़ा है.

 

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