Taliban ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनके साथ सहयोग करने का किया आग्रह

Taliban: तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान में शासन का एक वर्ष पूरा किया, कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने विश्व नेताओं के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सरकार को मान्यता देने और तालिबान (Taliban) नेतृत्व के साथ सहयोग करने का आग्रह किया.

विदेश मंत्री अमीर खान ने किया आग्रह

ANI से मिली अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, खामा प्रेस ने सोमवार को एक बयान में कहा की, “हम सभी को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान और नई सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए.”

मुत्ताकी ने यह टिप्पणी 15 अगस्त को इस्लामिक अमीरात की सत्ता में वापसी की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक समारोह में की थी. आगे बोलते हुए, मुत्ताकी ने दोहा समझौते पर प्रकाश डाला और कहा कि अफगानिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका सहित किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है. जो कि खामा प्रेस के अनुसार, कतरी राजधानी में शांति वार्ता के दौरान सहमत उनकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है.

इस बीच, दूसरे उप प्रधानमंत्री, अब्दुल सलाम हनफ़ी और इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने उन उपलब्धियों के बारे में बात की जो उनके नेतृत्व ने अफगान लोगों और राष्ट्र के लिए लाईं.

पिछले एक साल में, तालिबान के शासन ने कई अफ़गानों को देश से भागने और पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए मजबूर किया है. जब से तालिबान ने पिछले साल काबुल में सत्ता पर कब्जा किया था. मानवाधिकारों की स्थिति अभूतपूर्व पैमाने के राष्ट्रव्यापी आर्थिक, वित्तीय और मानवीय संकट से बढ़ गई है.

लगातार हत्या, मस्जिदों और मंदिरों को नष्ट करने के मामले आ रहे सामने

बता दें की, नागरिकों की लगातार हत्या, मस्जिदों और मंदिरों को नष्ट करने, महिलाओं पर हमला करने और क्षेत्र में आतंक को बढ़ावा देने से जुड़े मानवाधिकारों के निरंतर उल्लंघन के साथ आतंक, हत्या, विस्फोट और हमले एक नियमित मामला बन गया है.

देश से अमेरिकी सेना की वापसी के साथ, देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा करने वाले बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई है. UNAMA के अनुसार, कम से कम 59 प्रतिशत आबादी को अब मानवीय सहायता की आवश्यकता है. 2021 की शुरुआत की तुलना में 6 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई है.

UNAMA के अनुसार, देश के मीडिया परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं. जिसमें आधे से अधिक स्वतंत्र मीडिया को बंद करना, सैकड़ों पत्रकारों को निकालना, और बढ़ते कार्य प्रतिबंध, हिंसा और पत्रकारों के खिलाफ धमकियां शामिल हैं.

अफगानिस्तान में मीडिया के खिलाफ लगातार बढ़ते प्रतिबंधों ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) द्वारा गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए वैश्विक स्तर पर व्यापक आलोचना की है. तालिबान से स्थानीय पत्रकारों को परेशान करना बंद करने और निरंतर नजरबंदी के माध्यम से भाषण की स्वतंत्रता को रोकने की मांग की है.

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