Taiwan: चीन ने अमेरिका से ताइवान को हथियार बेचने की योजना को ख़त्म करने के लिए कहा

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने सोमवार को जानकारी दी है की, चीन ने ताइवान (Taiwan) को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध किया और अमेरिका से हथियारों की बिक्री योजना को रद्द करने का आग्रह भी किया है. बता दें की,अमेरिका के विदेश विभाग ने ताइपे (Taipei City) को तकनीकी सहायता के तौर पर 108 मिलियन डॉलर की तक की सेना की बिक्री को मंजूरी दी थी.

चीन ने क्यों किया ऐसा

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, यह बताया गया कि अमेरिकी विदेश विभाग ने संयुक्त राज्य अमेरिका में ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि कार्यालय को सैन्य तकनीकी सहायता के लिए 108 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक की बिक्री को मंजूरी दी थी. जवाब में वांग ने कहा कि चीन (China) के ताइवान (Taiwan) क्षेत्र में अमेरिकी हथियारों की बिक्री एक-चीन सिद्धांत और तीन चीन-अमेरिका संयुक्त विज्ञप्तियों, विशेष रूप से 17 अगस्त की विज्ञप्ति का उल्लंघन करती है.

इसके अलावा वांग वेनबिन का कहना है की, चीन की संप्रभुता और सुरक्षा हितों को गंभीर रूप से ये डील कमजोर करती है. चीन-अमेरिका संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है. और ताइवान (Taiwan) जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाये रखने के लिए इस डील को तुरंत रद्द कर देना चहिए. इसी में तीनो देशों की भलाई है.

ख़बरों की माने तो, यह नवीनतम सौदा 2022 में ताइवान (Taiwan) द्वीप के लिए अमेरिका की चौथी हथियारों की बिक्री और बाइडेन (Joe Biden) प्रशासन के तहत पांचवां सौदा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा, “चीन इसका पुरजोर विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है. चीन (China) ने अमेरिकी पक्ष से एक-चीन सिद्धांत और चीन-अमेरिका संयुक्त विज्ञप्ति का पालन करने, ताइवान को हथियारों की बिक्री योजना को रद्द करने के लिए कहा है.”

इसके पहले भी चीन कर चुगा है विरोध

ऐसा नहीं है की चीन इसका विरोध पली बार कर रहा है. इसके पहले भी कई बार चीन इस डील का विरोध कर चुगा है. ताइवान को हथियार बेचने से नाराज चीन ने अमेरिकी कंपनियों पर  प्रतिबंध भी लगाया है. चीन ने इसके पहले अमेरिका के शीर्ष हथियार निर्माण कंपनी लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. विश्लेषकों का कहना था कि चीनी प्रतिबंध संकेतात्मक है क्योंकि लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) चीन को कोई हथियार नहीं बेचती.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ताइवान के लिए एक अरब डॉलर से अधिक के उन्नत हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी. इस कदम से चीन के नाराज होने और वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ने की आशंका बताई गई थी. अमेरिका ने बताया था की, ताइवान को अपनी रक्षा क्षमताओं में सुधार करने के लिए 135 भूमि से दागी जाने वाली मिसाइलों, संबद्ध उपकरणों की बिक्री और प्रशिक्षण को हरी झंडी दिखाई थी.

चीन ताइवान को हमेशा से ही अपने कब्ज़े में करना चाहता है. लेकिन उसको हमेशा अमेरिका के बीच में आने का डर रहता है. अमेरिका और ताइवान के बीच अकसर रक्षा समझौते होते रहते हैं. जिसकी वजह से ताइवान पर हमेशा ही चीन आंखें लाल रहती हैं. चीन को लगता है की अमेरिका हमेशा ताइवान की तरफदारी करता है.

 

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