September 25, 2022
Supreme Court ने कहा, चुनाव के दौरान 'फ्री गिफ्ट' बाटना है एक गंभीर मुद्दा

Supreme Court ने कहा, चुनाव के दौरान 'फ्री गिफ्ट' बाटना है एक गंभीर मुद्दा

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनावों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा फ्री में गिफ्ट दिए जाने के मामले को गंभीर मुद्दा करार दिया है. कोर्ट (Supreme Court) का कहना है की, बुनियादी ढांचे आदि पर यह राशि खर्च की जानी है.

फ्री गिफ्ट पर क्या कहा कोर्ट ने

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पैसे की कमी और लोगों के कल्याण, दोनों को संतुलित करना होगा. अदालत में आम आदमी पार्टी (आप) के पक्षकार ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं और फ्री में अंतर है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अर्थव्यवस्था का पैसा गंवाना और लोगों के कल्याण को संतुलित करना होगा.

बता दें की, शीर्ष अदालत (Supreme Court) एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें चुनाव चिन्हों को जब्त करने और सार्वजनिक धन से तर्कहीन मुफ्त उपहार बांटने का वादा करने वाले राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

सीजेआई ने कहा की, “यह एक गंभीर मुद्दा है. जो लोग विरोध कर रहे हैं. उन्हें यह कहने का अधिकार है कि वे टैक्स दे रहे हैं. राशि को बुनियादी ढांचे आदि के लिए खर्च करना है, न कि पैसे बांटने पर.”

सीजेआई ने आगे कहा की , “यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है और वित्तीय अनुशासन होना चाहिए. लेकिन भारत जैसे देश में जहां गरीबी है. हम उस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं. वह सख्त रूढ़िवादी हैं और विधायिका द्वारा निर्धारित क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं करना चाहते हैं.”

आम आदमी पार्टी के अधिवक्ता ने किया विरोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आम आदमी पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि, मुफ्त देने और कल्याणकारी योजनाओं के बीच भ्रम है और इस शब्द का इस्तेमाल बहुत गलत तरीके से किया जाता है.

अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे इस मुद्दे पर कहा की, कल्याणकारी उपाय एक राजनीतिक सौदा है. जो मतदाताओं और निर्वाचित के बीच किया जाता है. इस प्रकार हमने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार तैयार किया है. न्यायिक पुनर्मूल्यांकन अदालत को राजनीतिक दलदल में डाल देता है जिसे अदालतें पहले करने से इनकार कर चुकी हैं.

इस पर CJI ने जवाब दिया, “इसीलिए हम सतर्क हैं और हमने आरक्षण व्यक्त किया कि हम किस हद तक जा सकते हैं. आप हमें यह नहीं बता सकते कि इसकी जांच न करें.” आप ने एक आवेदन दायर किया था. जिसमें कहा गया था कि मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली और मुफ्त परिवहन जैसे चुनावी वादे ‘मुफ्त उपहार’ नहीं हैं. लेकिन एक असमान समाज में ये योजनाएं बेहद जरूरी हैं.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहीं ये बातें

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि अगर हम कहें कि मुफ्त में बांटना कल्याणकारी योजनाओं को हासिल करने का एकमात्र तरीका है तो यह आर्थिक आपदा का रास्ता है. उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक विधायिका मुफ्त में कुछ भी नहीं कर रही है. तब तक सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश निर्धारित कर सकता है.

याचिकाकर्ता के अनुरोध पर मुफ्त का वादा करने वाले राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने के लिए, CJI ने कहा कि वह राजनीतिक दल आदि का पंजीकरण रद्द करने के क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहते हैं. पीठ ने अब मामले को आगे की सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है.

 

 

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