September 29, 2022
टीवी पर हेट स्पीच के इस्तमाल को लेकर Supreme Court ने न्यूज़ चैनल समेत सरकार को लगाई फटकार

टीवी पर हेट स्पीच के इस्तमाल को लेकर Supreme Court ने न्यूज़ चैनल समेत सरकार को लगाई फटकार

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Supreme Court: जस्टिस के.एम. जोसेफ और हृषिकेश रॉय ने कहा कि एक टीवी बहस के दौरान एंकर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. यह देखना एंकर का कर्तव्य है कि प्रसारण के दौरान हेट स्पीच का उपयोग नहीं होना चाहिए.

अभद्र भाषा का नहीं होना चाहिए प्रयोग

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को हेट स्पीच के मुद्दे पर केंद्र की निष्क्रियता की निंदा की, जबकि केंद्र सरकार दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

इसी मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए, चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते शीर्ष अदालत से कहा था कि उसके पास राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने या नफरत फैलाने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने का कानूनी अधिकार नहीं है क्योंकि मौजूदा कानून हेट स्पीच या नफरत फैलाने वाले को परिभाषित नहीं करते हैं.

न्यायाधीशों के एम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ (Supreme Court) ने नफरत फैलाने वाली याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए कहा की,

“जब यह सब (टीवी समाचार चैनलों पर अभद्र भाषा) हो रहा है. तो भारत सरकार मूक गवाह के रूप में क्यों खड़ी है? केंद्र इसे एक तुच्छ मुद्दे की तरह क्यों ले रहा है? राजनीतिक दल आएंगे और जाएंगे, लेकिन राष्ट्र सहेगा.”

समाचार चैनलों को लगी फटकार

बता दें की, हेट स्पीच को बढ़ावा देने वाले समाचार चैनलों को फटकार लगाते हुए पीठ ने कहा कि टेलीविजन एंकर कुछ पैनलिस्टों को ऐसी टिप्पणी करने की अनुमति देते हैं. लेकिन दूसरे पक्ष को अपने माइक्रोफोन को म्यूट करके अपने जवाबी विचार व्यक्त करने से रोकते हैं.

पीठ ने कहा कि गलती करने वाले न्यूज एंकरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और ऐसे लोगों को भी तुरंत ऑफ एयर किया जाना चाहिए. पीठ ने आगे कहा की, “मुख्यधारा के टीवी चैनलों का अभी भी बोलबाला है. एंकर की भूमिका महत्वपूर्ण है और यह देखना उनका कर्तव्य है कि हेट स्पीच न हो कई बार जो लोग बोलना चाहते हैं सही बोले और शब्दों का सही चयन करें.”

इस बात पर जोर देते हुए कि हेट स्पीच की कोई परिभाषा नहीं है. एक याचिका की ओर से पेश अधिवक्ता (वकील) अश्विनी उपाध्याय ने प्रस्तुत किया कि हेट स्पीच के आरोपी लोगों पर अब आईपीसी की धारा 153 ए धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने पर सख्त एक्शन होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हेट स्पीच से राजनीतिक दलों को फायदा हो रहा है.

पीठ ने मामले को 23 नवंबर तक सुनवाई को किया पोस्ट

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि, एक विशेष कानून के साथ वह दिशा-निर्देश निर्धारित कर सकते है. जैसा कि विशाखा फैसले में किया गया था. विशाखा फैसले में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं से निपटने के लिए एक तंत्र तैयार किया था. हेट स्पीच की  रूपरेखा को परिभाषित करने के लिए अब सरकार एक्शन लेगी.

तबतक पीठ ने मामले को 23 नवंबर को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है. विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट संख्या 267 हेट स्पीच में भारतीय दंड संहिता, 1860 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में निम्नलिखित संशोधनों का सुझाव दिया है.

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