Sudan: संयुक्त अरब अमीरात से सूडान को मिल रही भोजन, दवा की सहायता

सूडान (Sudan) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सूडान (Sudan) को मंगलवार को पश्चिमी दारफुर क्षेत्र (western Darfur region) में गरीबों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्रदान किया गया भोजन और दवा ले जाने वाला एक सहायता विमान मिला है. पश्चिमी दारफुर क्षेत्र (western Darfur region) में संयुक्त अरब अमीरात सहायता भेज रहा है. भोजन से लेकर दवा तक हर संभव मदद की जा रही है.

अल-हादी इदरीस ने कहीं ये बातें

ANI से मिली अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सूडान (Sudan) की ट्रांजिशनल सॉवरेन काउंसिल के सदस्य अल-हादी इदरीस ने कहा, “ UAE के खलीफा बिन जायद अल नाहयान फाउंडेशन की ओर से दारफुर राज्यों और विशेष रूप से पश्चिमी दारफुर राज्य में प्रभावित और विस्थापित लोगों के लिए मानवीय सहायता प्रदान की जाएगी.”

बता दें की, सूडान में इदरीस और यूएई के राजदूत हमद मोहम्मद अल-जनेबी ने खार्तूम हवाई अड्डे पर सहायता विमान प्राप्त किया है. सूडान की संक्रमणकालीन संप्रभु परिषद ने पहले पश्चिम दारफुर राज्य (West Darfur State) में हाल के आदिवासी संघर्षों से प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए एक अभियान शुरू किया था. जानकारी के लिए बता दें की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहा है.

मुसीबतों से पहले में जूझ चुगा है सूडान

बीते वर्ष सूडान में मुसीबत के गहरे बदल छा गए थे. बता दें की, सूडान में सेना ने इमरजेंसी (आपातकाल) का एलान करते हुए प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था. जिस पर अमेरिका, यूरोपीय संघ, फ्रांस, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित दुनियाभर के देशों ने चिंता जताई थी.

अमेरिका ने इस तख्तापलट पर कहा था की, “सूडान में तख्तापलट के कदम से जुड़े नेता देश के लोकतांत्रिक परिवर्तन के महत्व को कम कर रहे हैं और उन्हें अपने रुख में नरमी लानी चाहिए.”सूडान के लिए UAE हमेशा से मसीहा बन कर खड़ा रहा है. जिस वक़्त सूडान में तख्तापलट हुआ था.

उस वक़्त संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने कहा था कि, सूडान में शांति एवं संयम का मार्ग अपनाया जाना चाहिए. सूडान को समझाते हुए संयुक्त अरब अमीरात ने कहा था की, “जैसा हमने बार-बार कहा है, परिवर्ती सरकार में बलपूर्वक किसी भी परिवर्तन से अमेरिकी सहायता पर असर पड़ सकता है.”

सूडान के विरोध में सड़कों पर उतरी थी जनता

सूडान ने हमेशा से ही मुसीबतों का सामना किया है. लेकिन बीते कुछ सालों में सूडान में बहुत सी घटनाएँ घट गईं. BBC में छपी एक खबर के मुताबिक, कामगार लोगों ने राष्ट्रीय हड़ताल की घोषणा की थी. जिसके बाद वह राजधानी खार्तूम की सड़कों पर गए थे .

उनकी मांग थी कि सैन्य शासन हटाकर नागरिक सरकार बहाल की जाए. इस दौरान सेना ने बल प्रयोग किया जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी. जानकारी के लिए बता दें की, एक वक़्त में सूडान को अफ्रीका का सबसे बड़ा देश माना जाता था.

लेकिन 2011 के बाद विभाजन हुआ और दक्षिण सूडान नामक एक नया देश बन गया. लेकिन यह विभाजन की लकीर 19वीं सदी से कई दशक पहले खिंच चुकी थी. हालाँकि, इस वक़्त वहाँ सैन्य शासन हट गया है.

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