लंबे समय से चल रहे खराब आर्थिक संकट के कारण लगातार चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने अपने भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए सहमत हो गए हैं।

श्रीलंका का कुल विदेश कर्ज 32 अरब$ का है | यहाँ एशिया की सबसे ज्यादा 17.5 % की महंगाई है | श्रीलंका का रुपया डॉलर के मुकाबले 45% गिर कर 292.5 के स्टार पर पहुंच गया है | जिससे वहां का इम्पोर्ट बिल बहुत बढ़ गया है |

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सांसद मैत्रीपाला सिरीसेना ने राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद कहा कि गोटबाया राजपक्षे इस बात पर सहमत हुए हैं कि एक नए प्रधाानमंत्री के नाम से एक राष्ट्रीय परिषद नियुक्त की जाएगी और मंत्रिमंडल में सभी राजनीतिक दलों के सांसद शामिल होंगे।

सिरीसेना, राजपक्षे से पहले राष्ट्रपति थे। वह इस महीने की शुरूआत में करीब 40 अन्य सांसदों के साथ दलबदल करने से पहले सत्तारूढ़ दल के सांसद थे। श्रीलंका दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है और इस द्वीपीय देश ने घोषणा की है कि वह अपने विदेशी ऋण की अदायगी स्थगित कर रहा है। उसे इस साल विदेशी ऋण के रूप में सात अरब डॉलर, और 2026 तक 25 अरब डॉलर अदा करना है। उसका विदेशी मुद्रा भंडार घट कर एक अरब डॉलर से भी कम रह गया है। विदेशी मुद्रा की कमी ने आयात को बुरी तरह से प्रभावित किया है, लोगों को खाने-पीने की चीजें, ईंधन, रसोई गैस और दवा के लिए घंटों कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। जिससे वहां की जनता में भारी विरोध है |

प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे सहित गोटाबाया और उनके परिवार का पिछले 20 वर्षों से श्रीलंका के लगभग हर क्षेत्र में वर्चस्व रहा है। मार्च से सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मौजूदा संकट के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, आर्थिक संकट में फंसने के बाद श्रीलंका में तकरीबन महीने भर से सरकार विरोधी जन आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी राजपक्षे परिवार से सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान कई बार गोटबया राजपक्षे और उनके भाई प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफे की मांग साफ ठुकरा दी थी। लेकिन ताजा जानकारी के अनुसार अब श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया अपने भाई को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए तैयार हो गए हैं।

सरकार के बागियों की मांग –

श्रीलंका में सत्तारूढ़ एसएलपीपी गठबंधन के बागियों जिनका प्रतिनिधित्व पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली ‘श्रीलंका फ्रीडम पीपुल्स पार्टी’ (एसएलएफपी) कर रही है, ने भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले से मुलाकात की और उन्हें देश में मौजूदा राजनीतिक गतिरोध तथा सबसे खराब आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए अपनी एक अंतरिम सरकारी व्यवस्था की योजना के बारे में जानकारी दी। एसएलएफपी के ये सदस्य श्रीलंका में सत्तारूढ़ ‘श्रीलंका पीपुल्स पार्टी’ (एसएलपीपी) में शामिल हैं, लेकिन इन्होंने अभी बगावती रुख इख्तियार कर रखा है।
यह मुलाकात राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की ओर से आर्थिक संकट का मुकाबला करने के लिए सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए बुलाई गई बैठक की पूर्व संध्या पर हुई। एसएलएफपी के महासचिव दयासिरी जयशेखर ने कहा, ‘‘अंतरिम सरकारी व्यवस्था के बारे में जानकारी देने के लिए हमने भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात की।’’ उन्होंने बागले से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘हमने उन्हें सर्वदलीय अंतरिम सरकार पर अपने विचारों से अवगत कराया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ यह सत्ता के बंटवारे की नहीं बल्कि देश को आर्थिक संकट से उबारने की व्यवस्था है। सांसदों के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है।’’

बैठक की पुष्टि करते हुए यहां स्थित भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया कि उच्चायुक्त बागले ने सांसदों के समूह से मुलाकात की और भारत की श्रीलंका का समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय उच्चायोग ने मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘सांसदों ने श्रीलंका की जनता के साथ खड़े रहने के लिए भारत के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने उच्चायुक्त से श्रीलंका की मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखी।’’

उन्होंने कहा कि एसएलएफपी और एसएलपीपी के असंतुष्टों की संख्या 50 है, जो राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से शुक्रवार को मुलाकात करेंगे। गोटबाया ने दो दिन पहले पत्र लिखकर संभावित अंतरिम सरकार के बारे में चर्चा करने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य दलों को आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि वे एक शर्त पर बैठक करने को तैयार हैं कि प्रधानमंत्री (महिंदा राजपक्षे) और मंत्रिमंडल के सदस्यों के बिना बैठक होनी चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या अंतरिम सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रधानमंत्री इस्तीफा देंगे, दयासिरी जयशेखर ने कहा कि ऐसा होने की संभावना नहीं है। गौरतलब है कि राजपक्षे परिवार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है और हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर करीब तीन सप्ताह से स्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं ने महिंदा राजपक्षे के सरकारी आवास को भी घेर रखा है और उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने 29 अप्रैल को तय की बैठक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद नई व्यवस्था पर चर्चा के लिए बैठक 29 अप्रैल को तय की गई है। यह कदम एक अंतरिम सरकार के लिए रास्ता बनाने के लिए प्रधानमंत्री पर इस्तीफा देने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दबाव की पृष्ठभूमि में आया है। बता दें कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों पर देश के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए उनके इस्तीफे की मांग को लेकर भारी जन विरोध प्रदर्शन के जरिए दबाव बढ़ रहा था।

By Satyam

Leave a Reply