Kashmiri Pandits: 2020 के बाद से जुलाई तक छह कश्मीरी पंडितों को आतंकियों ने मार गिराया

Kashmiri Pandits: केंद्र सरकार ने बुद्धवार को राज्य सभा में बताया की, 2020 से तब तक 6 कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandits) मारे जा चुके हैं. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने उच्च सदन में प्रस्तुत एक लिखित उत्तर में मौतों का विवरण भी साझा किया.

क्या बताया गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने

Times Of India से मिली जानकारी के मुताबिक,  गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया की कुलगाम, पुलवामा और श्रीनगर के मुख्य शहर में हुई मुठभेड़ों में 2021 में 4 कश्मीरी पंडितों की जान चली गई थी. लेटेस्ट रिकॉर्ड के अनुसार, 20 जुलाई 2022 तक कुल 6,514 कश्मीरी पंडित घाटी में रह रहे थे.

अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुलगाम जिले में अधिकतम 2,639 कश्मीरी पंडित निवास करते हैं. इसके बाद बडगाम में 1,204, अनंतनाग में 808, पुलवामा में 579, श्रीनगर में 455, शोपियां में 320, बारामूला में 294, बांदीपोरा में 66 और कुपवाड़ा में 19 हैं.

यह जानकारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कई कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) सहित कई लोग पिछले साल से घाटी में लक्षित हत्याओं का शिकार हुए हैं. कश्मीरी पंडितों के केंद्र शासित प्रदेश छोड़ने की भी खबरें आई हैं.

2022 में कश्मीरी पंडितों ने नहीं छोड़ी घाटी

वैसे तो कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandits) काफ़ी समय से घाटी से पलायन कर हें हैं. लेकिन मिली जानकारी  के मुताबिक, 2022 के दौरान किसी भी कश्मीरी पंडित ने कश्मीर घाटी नहीं छोड़ी है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कई और बातें भी साझा की हैं.

उन्होंने उच्च सदन को सूचित किया कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से, जम्मू-कश्मीर में आतंक से संबंधित घटनाओं में एक कश्मीरी पंडित सहित कुल नौ सरकारी कर्मचारियों की जान चली गई. राय ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है.

जिसके चलते  केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन को बताया की, “आतंकवादी हमलों में 2018 में 417 से 2021 में 229 तक काफी गिरावट आई है.”

पहले ऐसे होता था बर्ताव

कश्मीरी पंडितों के साथ पहले हद से ज्यादा दुर्व्यवहार होता है. एक महिला ने अपने अनुभव ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ के माध्यम से शेयर किए हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि जिस कश्मीर में वो बड़ी हुईं वो काफी अलग था और वो जब भी आँखें बंद करती हैं, उन्हें सुन्दर चिनार के पेड़, दूधगंगा नदी और भैरव मंदिर प्रकाशित हुए दिखते हैं.

उस महिला ने अपना दुख साझा करते हुए बताया की, उन्होंने याद किया कि 19 जनवरी, 1990 को मस्जिद से एक घोषणा की गई. तब वो अपने कमरे में थीं. वो तब अपने मेडिकल परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रही थीं. उन्होंने बताया कि तभी उनके चाचा दौड़ते हुए आए, कमरे में लाइट्स ऑफ किए और काँपते हुए कोने में बैठ गए.

बता दें की, इसके बाद पूरा परिवार घुप्प अँधेरे में छिप गया. महिला के अनुसार, मस्जिद से घोषणा हुई, “कश्मीर की आज़ादी ज़िंदाबाद! हमें पूरे कश्मीर से हिन्दुओं को मिटा देना है.” उस महिला के मुताबिक वहाँ पर आतंकवादी कहते थे की हम हिन्दुओं को अपनी ज़मीन पर नहीं रहने देंगे. बता दें की, महिला के अनुसार, इसके बाद उनके घर के सामने स्थित भैरव मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था.

 

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