कोलकाता में बनाई गई Sex Workers के जीवन को दर्शाने वाली सिलिकॉन दुर्गा माँ की मूर्ति

Sex Workers: कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान नई थीम पेश करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस साल के त्योहार के दौरान समारोह के लिए पहचान थीम के तहत यौनकर्मियों (Sex Workers) के जीवन को दर्शाने वाले पंडाल और मूर्तियां बनाई गई हैं.

लोकसभा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने किया पंडाल का उद्घाटन

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, कोलकाता में पंडाल शहर में नवपारा दादाभाई संघ पूजा समिति द्वारा लाया गया है. जिसका उद्घाटन सोमवार को लोकसभा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने किया. पश्चिम बंगाल में पूजा की तैयारियां नए और नए विषयों के प्रदर्शन के साथ जोरों पर हैं. हरबार कोलकाता में मूर्तिकार दुर्गा मूर्तियों को तैयार करते समय विभिन्न विषयों को प्रस्तुत करते हैं.

इस बार सेक्स वर्कर्स (Sex Workers) के जीवन को दर्शाने वाला एक ऐसा पंडाल लाया गया है. जो यह भी दिखाता है कि वे किस समाज में रहते हैं और किस तरह से लोग उन्हें देखते हैं. और जिस तरह से वे बिना किसी पहचान के एक अलग दुनिया में गुमनाम हैं.

बता दें की, पंडाल में पहली बार सिलिकॉन से बनी मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की गई है. जो शहर में पहले कभी नहीं देखी गई. मूर्ति को मां का रूप दिया गया है. जिसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि सेक्स वर्कर में भी मां का रूप होता है.

इस अवसर पर ANI से बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “यह मां दुर्गा का वरदान है. पूरा पश्चिम बंगाल त्योहार के रंगों में सराबोर है. मैं वर्षों से दुर्गा पूजा में आ रहा हूं, लेकिन यह एक बात है. मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं इस पंडाल का उद्घाटन कर रहा हूं. मैं सौगत जी और ममता बनर्जी का आभारी हूं.”

इन्होने ने डिजाईन की है पंडाल की कॉन्सेप्ट और थीम

बता दें की, पंडाल का कॉन्सेप्ट और थीम संदीप मुखर्जी ने डिजाईन किया है. कॉन्सेप्ट और थीम डिजाइनर संदीप मुखर्जी ने सेक्स वर्कर्स के काम पर अपना नजरिया व्यक्त किया और कहा कि लोगों के नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत है.

कॉन्सेप्ट और थीम डिजाइनर संदीप मुखर्जी ने कहा की,

“वेश्यावृत्ति (Prostitution) एक पेशा है. लेकिन आम लोगों के लिए, क्या यह एक पेशा है? हम कह सकते हैं कि हम किस पेशे में हैं. लेकिन क्या वे ऐसा कह सकते हैं? क्योंकि हम उन्हें एक अलग दृष्टिकोण से देखते हैं. हमें इस दृष्टिकोण को बदलना चाहिए. हमारा प्रोजेक्ट है समाज में बदलाव लाने के लिए. वे जो करते हैं उसके कारण हम उन्हें घेर लेते हैं. हम उन्हें समाज में प्रवेश नहीं करने देते हैं. जब वे भी अपना काम कर रहे हैं तो वे क्यों नहीं आ सकते?”

उन्होंने आगे कहा की, “हमने मूर्ति में एक माँ के परिवेश को जोड़ा है. जो यौनकर्मियों को दर्शाती है. हमने इसे आकर्षक और लोगों को छूने के लिए सिलिकॉन रूप दिया. यह पहली बार है कि माँ दुर्गा की एक मूर्ति बनाई गई है सिलिकॉन.”

टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहीं ये बातें

टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहा, उत्सव न केवल बंगाल का गौरव बल्कि ममता बनर्जी का जादू भी दिखा रहा है. इसके अलावा बता दें की, बारानगर के आयोजक और पार्षद अंजन पॉल ने कहा की,

“मेरे लिए थीम का प्रतिनिधित्व करना चुनौतीपूर्ण था. बहुत सारे लोग पंडाल देखने आ रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में लाखों लोग यहां आएंगे. मैंने यह पंडाल बनाया है. यह संदेश देने के लिए कि उन्हें समाज में शामिल किया जाना चाहिए. मैं पैसा नहीं इकट्ठा करता. हमारा लक्ष्य पंडाल बनाने में 30 लाख रुपये का निवेश करना है.”

नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव के दौरान, भक्त मां दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा करते हैं. ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके. इन नौ दिनों के दौरान, लोग उपवास रखते हैं. प्रत्येक देवी को समर्पित श्लोकों का पाठ करते हैं. नए कपड़े पहनते हैं. भोग लगाते हैं और अपने घरों को साफ करते हैं.

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