Saudi Crown Prince की भारत यात्रा क्यों है महत्वपूर्ण , ऊर्जा और रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर रहेगा जोर

Saudi Crown Prince: भारत में अगले साल G20 शिखर सम्मलेन होने जा रहा है. भारत के दृष्टिकोण से यह सम्मेलन बहुत ज़रूरी होने वाला है. G20 समूह में सऊदी अरब (Saudi Arab) का भारत के साथ सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा.

बीते कई सालों से भारत और सऊदी (Saudi Arab) के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. देखा जाए तो भारत की सऊदी पर ऊर्जा क्षेत्र में निर्भरता बहुत ज्यादा है. G20 शिखर सम्मलेन दोनों देशों का सहयोग रिश्तों को और मजबूत करने के लिए एक अहम भूमिका निभाएगा.

Saudi Arab अब भारत से व्यापर करने के लिए एक अहम देश बन गया है

2023 फरवरी जोधपुर के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाली है. अगले साल  G20 शिखर सम्मलेन में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, और यूरोपीय संघ से डेलिगेट्स आएंगे.

भारत में होने वाले G20 समिट में Saudi Arab के साथ ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्ते होंगे और मजबूत
Saudi Crown Prince की भारत यात्रा क्यों है महत्वपूर्ण , ऊर्जा और रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर रहेगा जोर

भारत के लिए G20 शिखर सम्मलेन की मेजबानी करना एक गर्व की बात होगी.

G20 समूह में भारत के सबंध लगभग सभी देशों के साथ अच्छे है. गल्फ देशों में सऊदी अरब सबसे महत्वपूर्ण देश है इसलिए Saudi Crown Prince का भारत दौरा बहुत खास है।

Saudi Crown Prince की भारत यात्रा में हरित ऊर्जा (Green Energy) को लेकर भी भारत और सऊदी के बीच आने वाले समय में कई समझौते होने की उम्मीद है.

2018 में दुनिया भर में ऊर्जा खपत इतनी बढ़ी हैं

बता दें की, 2018 में दुनिया भर में ऊर्जा खपत में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. सऊदी अरब (Saudi Arab) ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है और भारत एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता है. अब भारत अक्षय ऊर्जा (renewable energy), विशेष रूप से सौर ऊर्जा (Solar Energy) और पवन ऊर्जा (wind energy) में टेक्नोलॉजी विकसित करने की कोशिश कर रहा है. ऐसी उम्मीद की जा रही है की इसमें सऊदी अरब भारत की काफी मदद करेगा.

भारत एक प्रमुख एशियाई रिफाइनिंग हब है. जिसकी 23 रिफाइनरियों में प्रति वर्ष लगभग 250 मिलियन टन की क्षमता है. जिसे सरकार की 2025 तक 400 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना है. सऊदी तेल का एक प्रमुख आयातक होने के नाते, भारत को लंबे समय से व्यापार और ऊर्जा सहयोग दे रहा है. इसके अलावा, दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले और मानव संसाधन संपन्न देशों में से एक होने के नाते, भारत सऊदी अरब से साथ ऊर्जा क्षेत्र में अपना अहम योगदान दे रहा है.

भारत का कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता है सऊदी अरब

अगर तेल के बात करें तो इराक के बाद सऊदी अरब वर्तमान में भारत का कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता है. भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 18% और अपनी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (Liquified Petroleum Gas-LPG) आवश्यकता का लगभग 22% सऊदी अरब से आयात करता है.

अमेरिका, चीन और जापान के बाद सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है. बीबीसी में छपी एक खबर के मुताबिक भारत और सऊदी के बीच वर्ष 2021 की तुलना में व्यापार में 49.5% की वृद्धि हुई है.

Saudi Crown Prince के सत्ता में आने से रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश आ रहें हैं साथ

पहले की तरह भारत अब सऊदी के साथ ऊर्जा जरूरतों और व्यापार में ही सहयोगी नहीं है.
देश में 2014 में नरेंद्र मोदी की NDA सरकार आने के बाद से ही दोनों के संबंधो में और गर्माहट आयी है और सऊदी अरब की नई लीडरशिप भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रही है.

2019 में Saudi Crown Prince के भारत दौरे में दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौते हुए थे. दोनों देशों ने रक्षा रक्षा क्षेत्र में सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable energy), सुरक्षा सहयोग और नागरिक उड्डयन सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में 12 समझौता और ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे.

दिसंबर 2020 में, तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (MM Naravane) ने पहले भारतीय सेना से दो महत्वपूर्ण खाड़ी देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) का पहली बार दौरा भी किया था.

फिर वर्ष 2021 में भारत और सऊदी अरब ने अल-मोहद अल-हिंदी (Al-Mohed Al-Hindi) अभ्यास नामक अपना पहला नौसेना संयुक्त अभ्यास शुरू किया था.

 

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