September 25, 2022
पाकिस्तानी एक्टिविस्ट Sanna Ejaz ने कहा की, पाकिस्तानी सेना ने देश को जेल बना दिया है

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट Sanna Ejaz ने कहा की, पाकिस्तानी सेना ने देश को जेल बना दिया है

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Sanna Ejaz: यूरोपीय फाउंडेशन के अनुसार, पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता सना एजाज ने कहा कि पाकिस्तान सेना ने देश को सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियंत्रित जेल जैसी प्रणाली में बदल दिया है. इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) सैन्य शासन को मजबूत करने में विशेष रूप से केंद्रीय भूमिका निभा रहा है.

सना एजाज ने एक इंटरव्यू में बताई ये बातें

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के पाकिस्तानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता सना एजाज (Sanna Ejaz) ने ईएफएसएएस के निदेशक जुनैद कुरैशी के साथ एक इंटरव्यू में ये टिप्पणी की.

एजाज पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) की एक प्रमुख सदस्य होने के साथ-साथ वाक मूवमेंट की संस्थापक सदस्य हैं, जिसका उद्देश्य पश्तून महिलाओं के बीच राजनीतिक जागरूकता लाना है. वह पूर्व में अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) की युवा शाखा की उपाध्यक्ष थीं.

सना एजाज को 2018 में पाकिस्तान टेलीविजन कॉरपोरेशन (पीटीवी), पाकिस्तान की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा में उनके पद से हटा दिया गया था. क्योंकि पाकिस्तान में मानवाधिकारों और विशेष रूप से अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर उनकी सक्रियता थी. तब से, वह तीन हत्या के प्रयासों से बची है और अब लंदन में रहती है.

यह बताते हुए कि 2007 में सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता और पत्र  कारिता में उनकी कहानी कैसे शुरू हुई. उन्होंने कहा कि उनके पिछले नियोक्ताओं पर उनके सक्रिय प्रयासों के कारण पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा अक्सर दबाव डाला जाता था.

पाकिस्तान में हैं जेल जैसे हालात

उन्होंने कहा कि सैन्य प्रतिष्ठान ने पाकिस्तान को बदल दिया है. उन्होंने (Sanna Ejaz) कहा कि अब देश सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियंत्रित जेल जैसी व्यवस्था में बदल गया है. जिसमें इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसएच) सैन्य शासन को मजबूत करने में विशेष रूप से केंद्रीय भूमिका निभा रहा है.

एजाज ने सुझाव दिया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमन सेना के घरेलू शासन मॉडल में एक प्रमुख घटक है. उन्होंने तर्क दिया कि महिला कार्यकर्ताओं द्वारा अनुभव किया गया दमन विशेष रूप से पाकिस्तान में पितृसत्तात्मक संरचनाओं के प्रसार के कारण अत्यधिक है.

अधिकारियों द्वारा नियोजित रणनीति में महिला कार्यकर्ताओं की चरित्र हत्या, कार्यकर्ताओं के परिवारों को धमकी देना और परिवार के पुरुष सदस्यों को ऑनर ​​किलिंग के लिए प्रेरित करना शामिल है. बलूचिस्तान और पश्तून आदिवासी बेल्ट के बड़े हिस्से जैसे राजनीतिक और भौगोलिक रूप से परिधीय क्षेत्रों में मीडिया प्रतिबंधों को लागू करके राज्य द्वारा दमनकारी गतिविधियों को सुगम और सक्षम किया गया है.

सना एजाज ने लिंग आधारित भेदभाव पर भी की बात

एजाज ने पहले से मौजूद सांस्कृतिक संरचनाओं पर जोर दिया, लिंग आधारित भेदभाव, कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई और मीडिया कवरेज की कमी पर जोर दिया. उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद सैन्य तख्तापलट और मार्शल लॉ के वास्तविक रूप से लागू होने से पाकिस्तानी इतिहास और समाज पर हावी हो गया.

जिससे सैन्य प्रतिष्ठान को जेल जैसी संरचना विकसित करने की अनुमति मिली जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव करती है. पश्तून तहफुज आंदोलन जैसे संगठन, जिनमें से एजाज हिस्सा है, उन मौलिक अधिकारों की मांग पर केंद्रित हैं जो पाकिस्तानी संविधान सभी पाकिस्तानी नागरिकों से वादा करता है.

भारत के विपरीत, एजाज ने रेखांकित किया, पाकिस्तान 1947 के बाद लोकतांत्रिक सुधारों को पेश करने के लिए अनिच्छुक रहा है. बजाय इसके कि औपनिवेशिक युग के कानूनों जैसे फ्रंटियर क्राइम रेगुलेशन को जारी रखते हुए औपनिवेशिक शासन के दृष्टिकोण के प्रमुख घटकों को बनाए रखा जाए.

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