Srilanka में एक बार फिर तेज़ हुआ आर्थिक संकट और पुलिस की बर्बरता को लेकर विरोध प्रदर्शन

Srilanka: समाचार एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक,  हजारों श्रीलंकाई लोगों ने गुरुवार को राजधानी कोलंबो में नागरिक अधिकार समूहों (civil rights groups), ट्रेड यूनियनों (trade unions) और छात्रों के साथ आर्थिक स्थिति और पुलिस की बर्बरता पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया है.

Srilanka में फिर से उग्र हुआ विरोध प्रदर्शन

WION से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका (Srilanka) में एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है. बीते महीनों से श्रीलंका (Srilanka) के हालात ख़राब हैं. श्रीलंका बिलकुल कंगाल हो चुगा है. श्रीलंका दशकों में अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. बता दें की, वार्षिक खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति (Annual food price inflation) 85.8 प्रतिशत है. और गैर-खाद्य वस्तुओं (non-food items) की कीमतें 62.8 प्रतिशत हैं.

Srilanka में एक बार फिर तेज़ हुआ आर्थिक संकट और पुलिस की बर्बरता को लेकर विरोध प्रदर्शन
Srilanka में एक बार फिर तेज़ हुआ आर्थिक संकट और पुलिस की बर्बरता को लेकर विरोध प्रदर्शन

स्थाई मीडिया का कहना है की, “जीवन यापन की लागत बढ़ रही है, खाद्य मुद्रास्फीति 90 प्रतिशत से ऊपर है. और श्रीलंका के लोग वास्तव में, वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं.” ट्रेड यूनियन समन्वय केंद्र ने रैली की शुरुआत की है. संयुक्त जन आंदोलन ट्रेड यूनियनों और प्रमुख हस्तियों को एक साथ लाता है. यह वो यूनियन हैं जिन्होंने पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को हटाने के लिए पहले के विरोध का नेतृत्व किया था.

गोटाबाया राजपक्षे का हुआ था जमकर विरोध

गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ इस साल का विद्रोह 31 मार्च को शुरू हुआ था और 9 जुलाई को उनके आवास पर हमले के साथ समाप्त हुआ था. श्रीलंका की जनता ने उनके आवास पर कब्ज़ा कर लिया था. जिसके बाद से उन्हें विदेश भागना पड़ा था.

रानिल विक्रमसिंघे को 21 जुलाई को संसद में एक वोट से राष्ट्रपति चुने गए थे. रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका में तुरंत आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी थी. रानिल विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनने पर भी कई लोगों ने असंतोष जताया था.

श्रीलंका (Srilanka) की इकॉनमी पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है. श्रीलंका (Srilanka) में कोरोना महामारी के बाद से पर्यटन कम हो गया. जिसके चलते वहां की अर्थव्यस्था पूरी तरह से ख़त्म होने के कगार पर आ गई. हालात ये हैं की श्रीलंका में आज भी स्कूलों पर ताला लटक रहा है. 

गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा भरपूर पोषण

बहुत ज़रूरी ही सरकारी दफ्तर खुले हुए हैं. बिजली,पानी और खाने की समस्या से आम लोग जूझ रहे हैं. ANI में छपी एक खबर के मुताबिक, श्रीलंका (Srilanka) में लोगों को यह नहीं पता है की उनका दूसरे समय का भोजन कहाँ से आएगा.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है की श्रीलंका में  गर्भवती महिलाओं को भरपूर पोषण नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से आने वाली पीढ़ी को मुसीबतों और बीमारियों का सामना करना पड़ेगा. श्रीलंका के पड़ोसी देश उसकी हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहें हैं.

भारत ने भी अपने पड़ोसी मुल्क की हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है.

इस साल की शुरुआत में श्रीलंका आजादी के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है. भारत ने श्रीलंका को 3.8 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता दी है. जानकारी के लिए बता दें की, लगभग 2.9 बिलियन डॉलर के ऋण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ प्रारंभिक समझौते पर श्रीलंका ने हस्ताक्षर किए हैं.

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