केंद्र सरकार ने PFI पर लगाया 5 साल का बैन, 'गैरकानूनी गतिविधियों' का दिया हवाला

PFI: कई छापे और गिरफ्तारियों के बाद, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार प्रतिबंधित कर दिया था. इसके अलावा, पीएफआई (PFI) के सहयोगी संगठन  रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन  पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था.

PFI के खिलाफ मिले थे सबूत

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, देश भर में कई छापे और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारियों के बाद कट्टरपंथी संगठन, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर बुधवार को गृह मंत्रालय (MHA) ने आतंकी फंडिंग से कथित संबंधों के लिए पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.

मीडिया के हवाले से खबर है की, PFI संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग कई राज्यों ने की थी. हाल ही में आई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है. 22 सितंबर और 27 सितंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस ने पीएफआई (PFI) पर छापेमारी की थी.

बता दें की, पहले दौर की छापेमारी में पीएफआई (PFI) से जुड़े 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इस बीच, दूसरे दौर की छापेमारी में पीएफआई से जुड़े 247 लोगों को हिरासत में लिया गया था. जांच एजेंसियों को संगठन के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले, जिसके आधार पर संगठन पर प्रतिबंध लगाने का सरकार ने निर्णय लिया गया.

PFI पर बैन इस्लामिक जिहाद के खिलाफ एक निर्णायक कदम है

बता दें की,  जैसे ही केंद्र सरकार ने पीएफआई और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाया, और उसको गैरकानूनी संघ घोषित किया. वैसे ही भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया की, “पीएफआई पर प्रतिबंध लगाना इस्लामिक जिहाद के खिलाफ एक निर्णायक कदम है.”

कपिल मिश्रा का अधिकारिक ट्वीट…

इसके अलावा बता दें की, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता, शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर कहा की, “केंद्र सरकार, एमएचए (MHA) द्वारा मजबूत और समय पर कार्रवाई जिसने पांच साल की अवधि के लिए #PFI पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन हमने अतीत में देखा है कि कैसे कांग्रेस, सपा , राजद, वामपंथी आदि ने वोटबैंक के नाम पर आतंक को राजनीतिक संरक्षण दिया है.”

15 राज्यों में NIA ने की थी छापेमारी

22 सितंबर को  एनआईए (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 राज्यों  केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार और मणिपुर में 93 स्थानों पर पीएफआई के खिलाफ छापेमारी की थी. छापेमारी के पहले दौर में कम से कम 106 पीएफआई सदस्यों और उनके कथित सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था.

एनआईए (NIA) ने अन्य जांच एजेंसियों के साथ मिलकर देश में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए ऑपरेशन ऑक्टोपस (Operation Octopus) के तहत पीएफआई सदस्यों पर छापेमारी की थी.

पीएफआई के शीर्ष नेताओं और सदस्यों के घरों और कार्यालयों पर एनआईए (NIA) द्वारा दर्ज पांच मामलों के संबंध में तलाशी ली गई थी. जिसमें ये सबूत मिले थे की पीएफआई युवाओं को ISIS जैसे आतंकी संगठन में जाने के लिए प्रेरित कर रही है. वैसे जानकारों का कहना है की पीएफआई पर बैन सरकार की बड़ी उपलब्धि है.

2 thoughts on “केंद्र सरकार ने PFI पर लगाया 5 साल का बैन, ‘गैरकानूनी गतिविधियों’ का दिया हवाला”

Leave a Reply