Pakistan के स्वात में आतंकवाद के विरोध में जनता ने किया विरोध प्रदर्शन

Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में आतंकवाद के बढ़ते मामलों के बीच, सैकड़ों प्रदर्शनकारी हालिया आतंकी घटनाओं की निंदा करने के लिए एकत्र हुए और रविवार को घाटी में आतंकवादियों के अत्याचार को रोकने के लिए कार्रवाई की मांग की है.

इतने आंदोलनकारी थे मौजूद

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, आतंकवाद से त्रस्त घाटी में शांति की मांग करते हुए आंदोलनकारियों में बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग, वकील, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, डॉक्टर और छात्र शामिल थे. जिनके हाथों में तख्तियां थीं. जिन पर आतंकवादियों के खिलाफ नारे लिखे हुए थे और शांति की मांग की थी.

बता दें की, आतंकवादियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करने और पाकिस्तान (Pakistan) में आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि के लिए सरकार को फटकार लगाने के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने इस मामले पर मुख्यमंत्री महमूद खान और निर्वाचित प्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया.

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ताओं में जाहिद खान, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सलीम खान, अब्दुल जब्बार खान, शेर शाह खान, अख्तर अली, अयूब अशरे, डॉ खालिद महमूद, इदरीस बच्चा, सरदार यूसुफजई सहित कई अन्य शामिल थे.

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा किया है पाकिस्तान (Pakistan) ने अफगानिस्तान से सीमा पार हमलों की शिकायत की है. यह एक ऐसा मुद्दा है. जो राजनयिक तनाव का स्रोत बन गया है.

अफगान-तालिबान के अनुरोध पर हुआ था युद्धविराम

इस मुद्दे का राजनीतिक समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच अक्टूबर 2021 में बातचीत शुरू हुई थी. अफगान-तालिबान के अनुरोध पर हुई वार्ता के कारण नवंबर में एक महीने का युद्धविराम हुआ था. हालाँकि, संघर्ष विराम अधिक समय तक नहीं चल सका क्योंकि मतभेद जल्द ही सामने आ गए.

टीटीपी और पाकिस्तान सरकार के बीच चल रही शांति वार्ता गतिरोध पर पहुंच गई क्योंकि प्रतिबंधित समूह ने खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के साथ तत्कालीन संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्रों (FATF) के विलय को उलटने की अपनी मांग को मानने से इनकार कर दिया था.

गतिरोध को तोड़ने के लिए हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच कई बैठकों के बावजूद, शांति समझौते के मामले में टीटीपी के हथियार डालने के मुद्दे पर भी गतिरोध बना हुआ है.

FATF की टीम कर चुगी है पाकिस्तान का दौरा

जानकारी के लिए बता दें की, वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण पर नजर रखने वाले एफएटीएफ की एक उच्च-स्तरीय टीम ने चुपचाप पाकिस्तान की पांच दिवसीय यात्रा समाप्त की थी. जिसके दौरान उसने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की और ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए शर्तों को पूरा करने के लिए देश द्वारा उठाए गए कदमों की पुष्टि भी की थी.

अक्टूबर में पेरिस में होने वाली एफएटीएफ की अगली बैठक में 15 सदस्यीय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) टीम के निष्कर्षों पर चर्चा और समीक्षा की जाएगी. पाकिस्तान जून 2018 से पेरिस स्थित FATF की ग्रे सूची में है. जो मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच में विफल रहने के लिए आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए अग्रणी है.

FATF के आदेशों का पालन करने में विफलता के कारण पाकिस्तान उस सूची में बना हुआ है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने बताया कि ऑन-साइट टीम के निष्कर्षों के सकारात्मक परिणाम से पाकिस्तान को अंततः मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए सिस्टम में कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी.

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