September 25, 2022
Pakistan economic crisis: पाकिस्तान के आर्थिक संकट का ज़िम्मेदार कौन, राजनीतिक दल एक दुसरे पर लगा रहे आरोप, मुल्क की हालत गंभीर

Pakistan economic crisis: पाकिस्तान के आर्थिक संकट का ज़िम्मेदार कौन, राजनीतिक दल एक दुसरे पर लगा रहे आरोप, मुल्क की हालत गंभीर

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पाकिस्तान(Pakistan) में चल रहे आर्थिक संकट(economic crisis) की ज़िम्मेदारी कोई लेने को तैयार ही नहीं है.

इन दिनों पाकिस्तान की आर्थिक हालात बेहद बिगड़ते जा रहे हैं. रविवार के दिन पाकिस्तान की मौजूदा गठबंधन सरकार पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PML) और इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़(PTI) ने एक दुसरे पर पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाये हैं.

डूब रही Pakistan की आर्थिक व्यवस्था

भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका(Srilanka) की राह पर अब पाकिस्तान (Pakistan) है. पाकिस्तान अपने आर्थिक संकट को हल करने की कोशिश करते हुए श्रीलंका की नकल कर रहा है.

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान(Pakistan) के आर्थिक बजट को औपचारिक रूप से नेशनल असेंबली में पेश किया गया था. बजट पेश होने के दो दिन बाद ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग(PML) और इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार तहरीक-ए-इंसाफ़(PTI) एक दुसरे के खिलाफ आर्थिक प्रदर्शन करतीं नज़र आई.

मरियम औरंगजेब(Maryam Aurangzeb) ने ट्विटर पर शौकत तरीन(Shaukat Tarin) का विडियो साझा किया. इसके बाद मरियम औरंगजेब (Maryam Aurangzeb) ने कहा की –

” आखिरकार शौकत तरीन ने स्वीकार किया है की इमरान खान ने अपने चार साल के कार्यकाल में 20 हज़ार अरब रूपये का क़र्ज़ लिया है. जो पाकिस्तान के इतिहास में लिए गए क़र्ज़ का 76 फ़ीसदी है.”

इसके बाद पाकिस्तान के मौजूदा वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने कहा की, पीटीआई के तहत कुल सार्वजनिक ऋण 24,953 अरब रूपये से बढ़कर 44,336 अरब रूपये हो गया है. जिसका मतलब इसमें 78 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कुल ऋण और देनदारियां 29,879 अरब रूपये से बढ़कर 53,544 अरब रूपये हो गयी है. जिसका मतलब की 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी कि पाकिस्तान(Pakistan) को जल्द ही विदेशी मुद्रा भंडार, भोजन, ईंधन और दवाओं की कमी के साथ श्रीलंका की तरह के संकट का सामना करना पड़ेगा. ट्रू सीलोन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान तेजी से अपने चालू खाते के घाटे को बढ़ा रहा है और साथ ही तेजी से घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार को भी बढ़ा रहा है.

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