Pakistan Army: पाकिस्तान सेना ने देश की राजनीति में कोई भी भूमिका निभाने से किया साफ़ इनकार

Pakistan Army: देश की राजनीति में कोई भूमिका निभाने से पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) ने सार्वजनिक रूप से बिलकुल इनकार कर दिया  है. बता दें की, पाकिस्तान आर्मी पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विद्रोही तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ शांति वार्ता (Peace Talk) की है. बता दें की,पकिस्तान में सरकार और संसद ने अपनी-अपनी भूमिकाओं और शक्तियों का परित्याग कर दिया था.

सभी वार्ता अब संवैधानिक मानदंडों के अधीन होंगी

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, सेना (Pakistan Army) और सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया है की अब सभी वार्ता संवैधानिक मानदंडों के आधीन ही होगी. बता दें की, यह निर्धारित करना भी मुश्किल है कि सेना को अपने वर्तमान चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल कमर जावेद बाजवा के रूप में ईर्ष्या करने की आवश्यकता है या दया. जनरल कमर जावेद बाजवा का नाम सीधा पहले पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ और अब इमरान खान द्वारा जुड़ रहा है.

ऐसा बताया जा रहा है की, पाकिस्तान के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल कमर जावेद बाजवा राजनेताओं, पार्टियों और गठबंधनों से मतलब नहीं रखते हैं. लेकिन जनरल कमर जावेद बाजवा पर ये आरोप लगते रहें है की वो, अब इमरान खान और उनके समर्थकों के पसंदीदा बन गए  है. सेना के दृष्टिकोण से देखे तो पाकिस्तान में राजनीतिक गड़बड़ी चल रही है.

पाकिस्तान में सेना का है राज

ऐसा बताया जाता है की, राजनीतिक दलों, न्यायपालिका, नौकरशाही और मीडिया पाकिस्तान में सब कुछ सेना के समर्थन से चलती हैं. इसके साथ ही सेना पर ये भी आरोप लगता रहा है की पाकिस्तानी सेना कभी भी किसी सरकार के पांच के कार्यकाल को पूरा नहीं होने देती. 1947 में जब पाकिस्तान एक नए राष्ट्र के तौर पर उभरा तब इसकी कमान इसके राजनीतिक नेतृत्व के पास थी. लेकिन थोड़े ही समय में देश की राजनीति में सेना घुस आई.

बता दें की 2013 में  जब पाकिस्तान के 70 साल के इतिहास में पहली बार पांच साल के नागरिक शासन के बाद पाकिस्तान में तय समय पर चुनाव हुए. तो बहुत से जानकारों को लगा कि आखिरकार पाकिस्तान में लोकतंत्र आ गया है. हाल ही, में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता जाने में भी सेना का हाँथ बताया गया था.

कौन है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान

जानकारी के लिए बता दें की, आतंकवाद की फैक्ट्री कहे जाने वाले पाकिस्तान में अब तक जितने भी चरमपंथी संगठन अस्तित्व में आए हैं. उनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) सबसे खतरनाक माना जाता है. ऐसा माना जाता है की तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ही मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) पर भी हमला किया था.

जानकारों की माने तो, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अपने पैर पाकिस्तान में 2002 से ही पसार रहा है. (TTP) पाकिस्तान में एक क्षत्र राज करना चाहता है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के मनसूबे भी अफगानिस्तान में राज क्र रहे तालिबान जैसे ही हैं. (TTP) का कहना है की वो अफगानिस्तान में राज कर रहे तालिबान से बिलकुल अलग है लेकिन दोनों के मंसूबों को लगभग एक ही माना जाता है.

बता दें की, मौजूदा वक़्त में TTP का प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद है. हाल ही में ऐसा बताया जा रहा है की पाकिस्तान सरकार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के बीच अनबन चल रही है. जिसको लेकर TTP का प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद अपने अधिकारिक यूट्यूब साझा करते रहते हैं.

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