Pakistan के आर्मी चीफ जनरल बाजवा ने कबूला की, मुल्क की राजनीती में है सेना दखल

Pakistan: Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने स्वीकार किया कि सेना का पाकिस्तान की राजनीति में दखल है. और कहा कि सेना ने अब राजनीति में हस्तक्षेप बंद करने का फैसला किया है. पाकिस्तान (Pakistan) पर हमेशा से ये आरोप लगते आये हैं की पाकिस्तान की राजनीती सेना के इशारों पर चलती है. पाकिस्तान (Pakistan) में हर एक फैसला सेना के मन के मुताबिक होता है.

Pakistan की राजनीती में सेना का है बोल बाला

Dawn से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा का कहना है कि सेना ने दशकों से राजनीति में अवैध रूप से दखल दिया है और वह अब ऐसा नहीं करेगी. सेना प्रमुख के रूप में अपने अंतिम संबोधन में, बाजवा ने बुधवार को देश की सबसे शक्तिशाली संस्था का बचाव किया है.

रक्षा और शहीद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया भर की सेनाओं की शायद ही कभी आलोचना की जाती है, “लेकिन हमारी सेना की अक्सर आलोचना की जाती है. मुझे लगता है कि इसका कारण राजनीति में सेना की भागीदारी है. इसलिए फरवरी में सेना ने राजनीति में दखल नहीं देने का फैसला किया है.”

सेना के लिए किया जाता है अनुचित भाषा का इस्तमाल

आगे पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख ने कहा है की, “कई क्षेत्रों ने सेना की आलोचना की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया है. सेना की आलोचना करना राजनीतिक दलों और लोगों का अधिकार है. लेकिन इस्तेमाल की जाने वाली भाषा सावधानी बरतनी चाहिए.”

Pakistan के आर्मी चीफ जनरल बाजवा ने कबूला की, मुल्क की राजनीती में है सेना दखल
Pakistan के आर्मी चीफ जनरल बाजवा ने कबूला की, मुल्क की राजनीती में है सेना दखल

समारोह की शुरुआत बाजवा ने यह कहकर की कि सेना प्रमुख के तौर पर यह उनका आखिरी संबोधन है. उन्होंने कहा की, “मैं जल्द ही सेवानिवृत्त हो रहा हूँ. इस बार, यह समारोह आयोजित किया जा रहा है.”

भारत में नहीं होती सेना की आलोचना- जनरल बाजवा

जानकारी के लिए बता दें की, 1965 के युद्ध के शहीद नायकों के बलिदान को याद करने के लिए 6 सितंबर को रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में प्रतिवर्ष रक्षा और शहीद दिवस समारोह आयोजित किया जाता है. हालांकि, इस साल देश भर में बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इसे स्थगित कर दिया गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पूर्वी शहर रावलपिंडी में सेना मुख्यालय में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, 62 वर्षीय जनरल बाजवा ने आश्चर्य जताया कि पड़ोसी भारत में सेना की जनता द्वारा आलोचना क्यों नहीं की जाती है.

70 साल से राजनीति में सेना का है दखल

उन्होंने कहा, “मेरी राय में इसका कारण पिछले 70 साल से राजनीति में सेना का लगातार दखल है. जो असंवैधानिक है. इसीलिए पिछले साल फरवरी से सेना ने फैसला किया है कि वह किसी भी राजनीतिक मामले में दखल नहीं देगी.”

जनरल बाजवा ने कहा, “वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान में संस्थानों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज सभी ने गलतियां की हैं. यह समय है कि हम उनसे सीखें और आगे बढ़ें.” जनरल बाजवा ने पाकिस्तान की अनिश्चित आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला और सभी हितधारकों से अपने अहंकार को दूर करने और मिलकर काम करने और अपनी जीत और हार को स्वीकार करना सीखने का आह्वान किया है.

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