पूर्व अमेरिकी NSA John Bolton ने दोहा समझौते को बताया बड़ी गलती

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार NSA जॉन बोल्टन (NSA John Bolton) ने अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा समझौते पर हस्ताक्षर करने का जिक्र करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प की सबसे बड़ी गलती का उल्लेख करते हुए कहा कि तालिबान अफगान लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को विफल कर चुका है और एक बड़े पैमाने पर कई विदेशी लड़ाके अफगानिस्तान लौट आए हैं.

बोल्टन ने कही ये बातें

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए जॉन बोल्टन (NSA John Bolton) ने टोलोन्यूज के साथ एक साक्षात्कार में कहा है की,

“मुझे लगता है कि इतिहास ने इस तथ्य को साबित कर दिया है कि यह एक भयानक समझौता था. तालिबान जो उद्देश्य चाहता था वह अमेरिका, नाटो, अफगानिस्तान से बाहर था, बाकी सब कुछ गौण था. इस्लामी अमीरात ने कहा है अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहा और बड़ी संख्या में विदेशी लड़ाके अफगानिस्तान लौट आए.”

दोहा सौदे को एक भयानक समझौता बताते हुए, जॉन बोल्टन ने आगे कहा कि तालिबान अमेरिका और नाटो को अफगानिस्तान से बाहर करना चाहता था. जो पिछले साल 15 अगस्त को अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद सफल हुआ था.

बोल्टन (NSA John Bolton) ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति के लिए अमेरिका के पूर्व दूत ज़ाल्मय खलीलज़ाद ने स्थिति में सकारात्मक योगदान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि खलीलज़ाद आदेश ले रहे थे.

अमेरिका के पूर्व दूत पर साधा निशाना

अफगानिस्तान में शांति के लिए अमेरिका के पूर्व दूत पर निशाना साधते हुए बोल्टन ने कहा, “स्पष्ट हो, वह राष्ट्रपति ट्रम्प और सचिव पोम्पिओ से आदेश ले रहे थे. इसलिए ज़ाल के प्रदर्शन के बारे में जो भी आलोचना की जाती है.उसे ट्रम्प और पोम्पिओ दोनों के निर्देश की आलोचना के रूप में समझा जाना चाहिए.” बोल्टन ने आगे कहा की,

“मुझे बहुत डर है कि अफगानिस्तान से आतंकवादी हमले शुरू करने के लिए किए गए प्रयासों के बारे में हमारा ज्ञान गहरा अधूरा है और जोखिम अधिक है और अगर हम अभी भी वहां होते तो हमारे पास आतंकवादी हमलों के लिए इन योजनाओं का पता लगाने का एक बेहतर मौका हुआ. अब हम पूरी तरह से अंधे नहीं हैं. लेकिन हम निश्चित रूप से उस स्थिति में नहीं हैं, जैसे हम थे.”

अमेरिका और तालिबान ने फरवरी 2020 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अध्यक्षता में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते में कहा गया है कि अफगान धरती से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान हिंसा को कम करेगा और गारंटी देगा कि उसकी धरती आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं होगी.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार थे जॉन बोल्टन. जॉन बोल्टन की आक्रामक नीती की वजह से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनको बर्खास्त कर दिया था. उन्होंने ट्वीट कर लिखा था की, ‘मैंने कल रात जॉन बोल्टन को सूचित किया था कि व्हाइट हाउस में उनकी सेवाओं की अब कोई जरूरत नहीं है. मैं उनके कई सुझावों से असहमत था.’ उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह जॉन बोल्टन की नीतियों से संतुष्ट नहीं है.

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