Nicaragua: अमेरिका ने लिया बड़ा फैसला निकारागुआ के 93 अधिकारीयों के वीज़ा पर लगाया प्रतिबंध

निकारागुआ (Nicaragua) के 93 अधिकारीयों के वीज़ा पर अमेरिका(America) ने प्रतिबंध लगा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन(Joe Biden) ने उन अधिकारीयों पर प्रतिबंध लगाया है जिन पर उनको “लोकतंत्र को कमज़ोर” करने का शक था.

क्यों लगा Nicaragua के अधिकारीयों पर प्रतिबंध

निकारागुआ (Nicaragua) के अधिकारीयों पर प्रतिबंध लगने का सबसे बड़ा कारण है निकारागुआ (Nicaragua) में हुए चुनाव. पिछले साल निकारागुआ (Nicaragua) में डेनियल ओर्टेगा (Daniel Ortega) के दुबारा राष्ट्रपति बन्ने को लेकर अमेरिका(America) ने लोकतंत्र की हत्या करने के समान ठराया था. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) के अनुसार 93 अधिकारीयों  में न्यायधीश, अभियोजक, गृह मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने एक बयान जारी करते हुए कहा की, “अमेरिका ओर्टेगा-मुरिलो शासन द्वारा राजनीतिक कैदियों की अन्यायपूर्ण हिरासत और नागरिक समाज के सदस्यों के खिलाफ चल रहे दुर्व्यवहार के बारे में गहराई से चिंतित हैं.” एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने आरोप लगाते हुए कहा की, न्यायधीश और अभियोजकों ने ओर्टेगा और उनकी पत्नी के साथ मिल कर चुनाव में हेर फेर किया है.

यूरोपीय संघ सहित वाशिंगटन ने ओर्टेगा की जीत को बताया था तमाशा

एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) का कहना है की, नेशनल असेंबली के सदस्यों और आन्तरिक मंत्रालय के अधिकारीयों ने 400 से अधिक गैर सरकारी और तमाम विश्वविद्यालय पर कब्ज़ा करने में ओर्टेगा और मुरिलो की मदद करने का आरोप लगाया है. यूरोपीय संघ(European Union) और वाशिंगटन(washington) ने ओर्टेगा की जीत को तमाशा बताया था.

उनका कहना था की निकारागुआ (Nicaragua) के राष्ट्रपति धांधली करके जीते हैं.

यूरोपीय संघ(European Union) और वाशिंगटन(washington) का कहना है की जिसने भी डेनियल ओर्टेगा (Daniel Ortega) के खिलाफ चुनाव लड़ने की कोशिश की है उस पर सरकार ने झूठी कार्यवाही की है.

दर्जनों नेताओं को गिरफ़्तार किया गया. कई को बिना किसी आधार के जेल भेजा गया और कई नेता तो देश छोड़ कर ही भाग गए.

इसी बीच निकारागुआ (Nicaragua) के राष्ट्रपति ने अपना बचाव करते हुए कहा की जो भी नेता विपक्ष में खड़े थे वो कोई विपक्षी नेता और उम्मीदवार नहीं थे बल्कि अपराधी और आतंकवादी थे. उनका कहना है की अगर ऐसे नेता विपक्ष में खड़े होते तो वो देश के लिए एक बड़ा खतरा थे.

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