Gujrat में मोरबी केबल ब्रिज गिरने से 60 से अधिक की मौत

Gujrat: Gujrat की मच्छु नदी पर बना मोरबी केबल ब्रिज 142 साल पुराना था। यह पुल पिछले कुछ समय से बंद था . मरम्मत के बाद पांच दिन पहले ही यह पुल दोबारा आम लोगों के लिए खोला गया था।

यह घटना शाम करीब 6.40 बजे हुई और इस दुर्घटना में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 17 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

Gujrat के राजकोट से बीजेपी सांसद मोहनभाई कल्याणजी कुंदरिया ने कहा कि NDRF बचाव अभियान चला रहा है. उन्होंने आगे कहा, “130 से अधिक शव बरामद किए गए, जिनमें से अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं. NDRF की टीम का बचाव अभियान जारी है. हम इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं, यह बहुत दुखद है.”

बेहतरीन इंजीनियरिंग का नमूना, कला और पुराने होने के कारण इस गुजरात के बेस्ट टूरिस्ट प्लेस में शुमार किया जाता था। मच्छु नदी पर बना यह ब्रिज मोरबी के लोगों के एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था।

आजादी से 67 साल पहले हुआ था निर्माण

Gujarat के मोरबी में मच्छु नदी पर बने इस पुल का निर्माण साल 1880 में पूरा हुआ था। इस ब्रिज का उद्घाटन 20 फरवरी 1879 को मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था।
उस समय इस ब्रिज के निर्माण में लगभग 3.5 लाख रुपये की लागत आई थी। और इसके निर्माण के लिए सारा सामान इंग्लैंड से आयात किया गया था। निर्माण के बाद से कई बार इसका मरम्मत किया जा चुका है।

पिछले 6 महीने से इसे जनता के प्रयोग के लिए बंद कर दिया गया था। इस दौरान इसकी मरम्मत का काम कराया जा रहा था। दीवाली के अगले दिन यानी 25 अक्तूबर को इसे जनता के लिए दोबारा खोला गया था। Gujrat सरकार ने मरम्मत में करीब 2 करोड़ रुपये खर्च आया था ।

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Gujrat का यह सस्पेंशन ब्रिज है ऐतिहासिक

दुर्घटना का शिकार हुआ मोरबी का यह पुल एक लंबे इतिहास का साक्षी भी रहा है। इसने स्वतंत्रता के लिए भारतीयों की लड़ाई भी देखी और फिर भारत के उज्जवल वर्तमान को भी। यह केवल Gujrat ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक धरोहर थी। बता दें कि इस पुल की लंबाई 765 फीट है और इस पुल पर जाने के लिए 15 रुपए फीस लगती है।

By Satyam

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