September 25, 2022
Military Raid: श्रीलंका के विरोध शिविरों पर हुई सैन्य छापेमारी, नेता हुए गिरफ्तार

Military Raid: श्रीलंका के विरोध शिविरों पर हुई सैन्य छापेमारी, नेता हुए गिरफ्तार

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श्रीलंका में सेना ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया है. उसके बाद राष्ट्रपति सचिवालय पर कब्जा (Military Raid) भी कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैनिकों ने निकटवर्ती गोटागोगामा विरोध स्थल पर तंबुओं को भी नष्ट कर दिया है. इसके साथ ही कई विरोध नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. लगभग 100 प्रदर्शनकारियों के साथ क्षेत्र को घेर लिया है. प्रदर्शनकारियों और नेताओं पर सेना अब अपना सख्त रुख अपना रही है.

प्रदर्शनकारियों पर हुआ सैन्य हमला

Aljazeera की खबर के मुताबिक, श्रीलंका में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सैन्य हमला (Military Raid) हुआ है. बता दें की, प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास टेंपल ट्रीज के सामने बने शिविर से प्रदर्शनकारियों के हटने के कुछ घंटे बाद सैन्य हमला हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने पहले ही 22 जुलाई को राष्ट्रपति सचिवालय से हटने के अपने इरादे की घोषणा कर दी थी. और बता दिया था की उनके इरादे अपने प्रदर्शन को लेकर क्या हैं.

बता दें की, गोटागोगामा (GotaGoGama) में बंद एक युवा प्रदर्शनकारी निपुण चरक जयशेखर (Nipun Charaka Jayasekara) ने अल जज़ीरा को बताया की, “लगभग आधी रात तक हमने सुना कि सेना का एक विशाल दल गोटागोगामा की ओर जा रहा था और अचानक हमने उन्हें राष्ट्रपति सचिवालय में भागते हुए देखा. इसके तुरंत बाद, उन्होंने क्षेत्र को घेर लिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से हमला किया.”

निपुण चरक जयशेखर (Nipun Charaka Jayasekara) ने कहा की, उन्होंने ने मामले को अपने कैमरा में कैद करने की कोशिश की लेकिन वो टूट गया. जयशेखर ने इसके बाद कहा की, “सैनिकों ने कुछ पर बहुत बुरी तरह से हमला किया. सैनिकों ने अमानवीय हमला किया जैसे कि उनके पास कोई दिल नहीं है. अब हमें कहीं नहीं जा सकतें  है. हम गोटागोगामा में बंद हैं. मेरे पास अब कुछ नहीं है; मेरा फोन भी नहीं. मैं अब एक पुराने फोन का उपयोग कर रहा हूं. मेरे पास केवल मेरे कपड़े बचे हैं.”

बुरी तरह घायल हुए प्रदर्शनकारी

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, ऐसा अनुमान है कि हमले में करीब 10 प्रदर्शनकारी बुरी तरह घायल हो गए हैं. विरोध स्थलों पर हमला छह बार के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के देश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद हुआ. हालाँकि रानिल विक्रमसिंघे के कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने पर भी जनता ने उनका बहुत विरोध किया. श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा. प्रदर्शन इतना उग्र हो गया था की, भीड़ राष्ट्रपति भवन में घुस गयी थी.

श्रीलंका में बार एसोसिएशन ने कहा कि, “उसे सैन्य छापे के बारे में अवगत कराया गया था और प्रदर्शनकारियों की जो गिरफ्तारियां हुई थीं वो उनको पहले से पता था.” एसोसिएशन की अध्यक्ष सलिया पीरिस ने एक बयान में कहा की, “अधिकारियों को सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के ठिकाने के बारे में पता होना चाहिए. मैंने आईजीपी से संपर्क करने की कोशिश की है और सेना कमांडर को भी मैसेज किया है की बेवजह क्रूर बल प्रयोग न करें. इस देश और इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान होगा.”

प्रदर्शनकारी ने बताया की, “सेना ने बिल्कुल कोई चेतावनी नहीं थी. सेना अचानक आ गई और हम पर हमला करते हुए और गंदी भाषा में चिल्लाते हुए हमें खदेड़ दिया.” एक युवा विरोध नेता शबीर मोहम्मद ने कहा कि, सोशल मीडिया के माध्यम से छापे की लाइव रिपोर्टिंग करते हुए एक वायु सेना अधिकारी ने उन पर हमला किया. जो की सरासर गलत है.”

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