तालिबान ने आंतकवादी Masood Azhar के अफगानिस्तान में होने का किया खंडन

Masood Azhar: तालिबान ने बुधवार को पाकिस्तान के इस दावे का जोरदार खंडन किया कि आतंकवादी मसूद अजहर (Masood Azhar) अफगानिस्तान में है और कहा कि वह पाकिस्तान में ही है. तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने पाकिस्तानी दावों का खंडन किया. जो आतंकवादी लिंचपिन को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी से हटते प्रतीत होते हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तालिबान सरकार को लिखा था पत्र

मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी मीडिया ने पहले बताया था कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तालिबान सरकार को एक पत्र लिखकर अजहर (Masood Azhar ) को गिरफ्तार करने के लिए कहा था. जिसके बाद में उसने दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में है.

जियो टीवी के हवाले से एक अज्ञात पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा, “हमने अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय को एक पेज का पत्र लिखकर मसूद अजहर का पता लगाने. रिपोर्ट करने और गिरफ्तार करने को कहा है. क्योंकि हमारा मानना ​​है कि वह अफगानिस्तान में कहीं छिपा है.” तालिबान ने दावे का जोरदार खंडन किया है.

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा की, “जैश-ए-मोहम्मद समूह का नेता यहां अफगानिस्तान में नहीं है. यह एक ऐसा संगठन है जो पाकिस्तान में हो सकता है. वैसे भी वह अफगानिस्तान में नहीं हैं और हमसे ऐसा कुछ नहीं पूछा गया है. हमने इसके बारे में समाचारों में सुना है. हमारी प्रतिक्रिया यह है कि यह सच नहीं है.”

तालिबान ने देश का नाम लिए बिना पाकिस्तान को निराधार आरोप लगाने से परहेज करने की चेतावनी भी दी है. तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा की, “हम सभी पक्षों से ऐसे आरोपों से बचने का भी आह्वान करते हैं जिनमें किसी सबूत और दस्तावेज की कमी है। इस तरह के मीडिया के आरोप द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं.”

‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराया है. देश इस समय मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है.

अफगानिस्तान को भेजे गए पत्र को पाकिस्तान द्वारा यह दिखाने का एक और प्रयास माना जा रहा है कि देश में आतंकवादी मौजूद नहीं हैं. बता दें की, जुलाई में काबुल में अल-कायदा अयमान अल-जवाहिरी को एक सशस्त्र अमेरिकी ड्रोन द्वारा मार गिराए जाने के बाद तालिबान सरकार को किसी भी विदेशी आतंकवादी समूह की मेजबानी नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में पहले से ही एक प्रश्न चिह्न का सामना करना पड़ा है.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि तालिबान ने 2020 के दोहा समझौते का घोर उल्लंघन किया. जिसके कारण जवाहिरी की मेजबानी करके अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी हुई.

पिछले महीने तालिबान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिकी ड्रोन को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देता है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद काफ़ी समय से छिड़ा है. अफगानिस्तान पाकिस्तान पर आरोपों की बौछार कर रहा है.

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