September 25, 2022
Kashmiri Pandit: कश्मीरी पंडितों की हत्या से आज भी दहल रही है कश्मीर घाटी

Kashmiri Pandit: कश्मीरी पंडितों की हत्या से आज भी दहल रही है कश्मीर घाटी

Spread the love

कश्मीरी पंडितों(Kashmiri Pandit) टारगेट किलिंग से आज भी कश्मीर(Kashmir) घाटी दहल रही है. ताज़ा मामलो पर अगर नज़र डालें तो, जम्मू-कश्मीर(Jammu-Kashmir) के कुलगाम(Kulgam) में एक हिंदू शिक्षक रजनी बाला की हत्या पर आज भी विरोध प्रदर्शन जारी है फिर से गुरुवार को दक्षिण कश्मीर के जिला कुलगाम में आतंकियों ने एक बैंक मैनेजर की गोली मार हत्या कर दी, कुलगाम के मोहनपोरा में इलाकी देहाती में इस वारदात को अंजाम दिया गया।

रजनी की अंतिम यात्रा के दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और ‘हमें न्याय चाहिए’ के नारे लगाए.

टारगेट किलिंग से खौफ़ खाए कश्मीरी पंडित फिर से पलायन को मज़बूर

हिंदू कश्मीरी पंडितों(Kashmiri Pandit) के पलायन का घाव 30 सालों बाद भी भरा नहीं है. अपनी ज़मीन से उजड़ जाने का दर्द जिंदगी भर रहता है,लेकिन केंद्रशासित प्रदेश जम्मू -कश्मीर (Jammu-Kashmir) के हिंदू पंडितों के लिए ये टीस ही मरहम का काम कर रही है. ये लोग टारगेट किलिंग (Target Killing) से इतने खौफ खाए हुए हैं कि अपनी ही सरज़मी से सामूहिक पलायन इनके लिए अकेला रास्ता बच गया है. अगर हम बात करें जनवरी 1990 की तो कश्मीर घाटी से हिंदू कश्मीरी पंडितों(Kashmiri Pandit) का पलायन हुआ था. मस्जिदों से घोषणा की गई कि कश्मीरी पंडित काफिर थे और पुरुषों को कश्मीर छोड़ना होगा.  अगर नहीं छोड़ा तो इस्लाम कबूल करना होगा वरना उन्हें मार दिया जाएगा.

जिन लोगों ने मजबूर हो कर कश्मीर छोड़ना तय किया उन्हें अपने घर की महिलाओं को वहीं छोड़ने के लिए कहा गया. कश्मीरी मुसलमानों को पंडित घरों की पहचान करने का निर्देश दिया गया ताकि उनका धर्म परिवर्तन किया जा सके या डराया-धमकाया जा सके. इस राज्य में हो रही टारगेट किलिंग के खिलाफ कश्मीर घाटी में पिछले 15 सालों से काम कर रहे हिंदू सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक पलायन किया है और वह घाटी वापस नहीं जाना चाहते. मंगलवार को टीचर रजनी बाला की हत्या से घबराए घाटी के सरकारी कर्मचारियों ने गुरुवार 2 जून को जम्मू में प्रदर्शन किया और डीएम को अपना ज्ञापन सौंपा.

बीते सालो में कितना हुआ पलायन

हाल ही में कश्मीर(kashmir) घाटी के कुलगाम में आतंकियों द्वारा टारगेट की गई शिक्षिका रजनी बाला की हत्या के बाद कश्मीर में काम कर रहे करीब 4000 ऐसे हिंदू कर्मचारियों ने सामूहिक पलायन किया है और अब वह वापस घाटी नहीं लौटना चाहते. 1990 में जब घाटी में आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो कश्मीरी पंडितों को उनकी जगह से भगा दिया गया. इसी साल फरवरी में सरकार ने राज्यसभा में बताया कि ऐसे करीब 44 हजार 684 कश्मीरी प्रवासी परिवार हैं, जिनमें 1 लाख 54 हजार 712 लोग शामिल हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक, 1989 के बाद घाटी में शुरू हुए आतंकवाद में 219 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी.

कश्मीरी(Kashmiri) प्रवासियों को राज्य में आवास देने के मकसद 920 करोड़ रुपये की लागत से घाटी में 6 हजार ट्रांजिट आवास बनाए जा रहे हैं. पिछले 5 साल में 610 प्रवासियों को उनकी जमीन वापस दिलाई गई. कश्मीरी(Kashmiri) प्रवासियों की वापसी के लिए मनमोहन सरकार ने 2004 में पैकेज देकर जम्मू के 4 इलाकों में दो कमरों के 5,242 मकान बनाए. इसके अलावा कश्मीर के बड़गाम जिले के शेखपोरा में 200 फ्लैट भी बनाए गए. इन 200 फ्लैट्स में से 31 फ्लैट उन स्थानीय प्रवासियों को दिए गए, ,जो घाटी में ही अपना घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published.