Kabul पहुँचा Iran का प्रतिनिधिमंडल, सीमा मुद्दों पर होगी चर्चा

Kabul: काबुल (Kabul) में ईरानी दूतावास ने घोषणा की है कि ईरानी उप विदेश मंत्री के नेतृत्व में ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल तालिबान अधिकारियों के साथ सीमा मामलों पर चर्चा करने के लिए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचा है.

काबुल ईरान में होगी वार्ता

ANI से मिली अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, काबुल (Kabul) में ईरान के दूतावास की घोषणा के अनुसार, रविवार 14 अगस्त को ईरानी प्रतिनिधिमंडल काबुल पहुंचा है. घोषणा में प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष के रूप में अलीरेज़ा बिगडेली का नाम है. वह विदेश मामलों के मंत्रालय में कांसुलर, संसदीय और ईरानी प्रवासी मामलों के उप विदेश मंत्री हैं.

दूतावास के अनुसार, ईरानी अधिकारी, बिगडेली की काबुल यात्रा का उद्देश्य कांसुलर सहयोग है. जिसमें साझा सीमाओं को सुरक्षित करना और अफगान नागरिकों की ईरान यात्रा को वैध बनाना शामिल है. ईरानी अधिकारी की यात्रा एक सीमा टकराव के साथ मेल खाती है, जो रविवार की रात, जुलाई के अंत में, ईरान के हिरमंद क्षेत्र में ईरानी सेना और तालिबान बलों के बीच हुई थी.

तालिबान के सीमा कमांडर मोहम्मद इब्राहिम हेवाद के अनुसार, यह टकराव ईरान की सीमा से लगे निमरूज प्रांत के कांग जिले के दरवेश इलाके में हुआ. तालिबान का एक सैनिक मारा गया और दूसरा घायल हो गया.

प्रतिनिधिमंडल काबुल का दौरा ऐसे समय में कर रहा है. जब अफगानिस्तान के लिए ईरान के विशेष प्रतिनिधि हसन काज़ेमी कोमी ने सीमा पर संघर्ष को रोकने के लिए एक संयुक्त ईरानी-अफगान समिति के गठन की घोषणा की.

ऐसे हैं तालिबान और ईरान के रिश्ते

BBC में छपी एक खबर के मुताबिक, ईरान का अफ़ग़ानिस्तान के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध है. ईरान खुद को अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों के संरक्षक के तौर पर पेश करता रहा है. शिया मुसलमान ईरान की बहुसंख्यक लोग है.

ईरान मुख्य रूप से शिया है जबकि अफगानिस्तान की आबादी कम से कम 85 प्रतिशत सुन्नी और लगभग 10 प्रतिशत शिया है. 1990 के दशक से, ईरान ने अफगानिस्तान को सुन्नी चरमपंथियों के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में देखा है. 1990 के दशक के मध्य में अफगान सरदारों से सत्ता हथियाने वाले तालिबान ने 2001 में यू.एस. और नाटो के हस्तक्षेप तक शासन किया था.

बता दें की,  अगस्त, 1998 में मज़ार-ए-शरीफ़ में तालिबान और नॉर्दर्न एलायंस के बीच भीषण लड़ाई हुई थी. इस लड़ाई में तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे गए थे. उस वक्त नॉर्दर्न एलायंस को ईरान का समर्थन हासिल था.

ईरान और अफगानिस्तान के बीच हो चुगी है सीमा पर मुठभेड़

जानकारी के लिए बता दें की,  एक स्थानीय अफगान अधिकारी के अनुसार, ईरान और अफगानिस्तान के तालिबान की सेनाओं के बीच सीमा लड़ाई में एक की मौत हो गई थी. निमरोज प्रांत में इस्लामिक अमीरात के सीमा कमांडर मावलवी मोहम्मद इब्राहिम हेवाद को अफगानिस्तान के टोलोन्यूज ने यह कहते हुए उद्धृत किया कि रविवार को एक तालिबान सैनिक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया था.

उन्होंने दावा किया कि ईरानी बलों ने लड़ाई शुरू की जो उन्होंने कहा कि निमरोज में कोंग जिले में हुई थी. रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने भी निमरोज में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि अगर तालिबान बलों की मौत हो गई थी. ईरान के सरकारी IRNA ने हताहत होने की सूचना पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि लड़ाई तालिबान बलों द्वारा शुरू की गई थी.

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