Mahsa Amini की मौत का सच सामने लाने वाले दो पत्रकार को Iran ने बताया CIA का एजेंट

Mahsa Amini: ईरान में 21 साल की महसा अमिनी (Mahsa Amini) की मौत ने देशभर में एक भीषण विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया. निलोफर हमीदी और इलाहे मोहम्मदी- दो पत्रकार जिन्होंने पहली बार 22 वर्षीय महसा अमिनी की खबर को दुनिया के सामने रखा था. ईरान ने इन पत्रकारों को सीआईए (CIA) एजेंट बताया है. बताया जा रहा है की, अमेरिका और अल्बानिया ईरानी सरकार के एक अन्य प्रमुख आलोचक ने बुधवार को एक अनौपचारिक UNSC सभा आयोजित करने जा रहे हैं.

Mahsa Amini की मौत का सच बताने वाले पत्रकार हैं CIA के एजेंट

WION से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान के खुफिया मंत्रालय और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया संगठन द्वारा शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पत्रकार इस समय ईरान की कुख्यात एविन जेल (notorious Evin prison) में बंद हैं.

Mahsa Amini की मौत का सच सामने लाने वाले दो पत्रकार को Iran ने बताया CIA का एजेंट
Mahsa Amini की मौत का सच सामने लाने वाले दो पत्रकार को Iran ने बताया CIA का एजेंट

इसके अलावा, बयान में ईरानी शासन ने सीआईए, मोसाद और इंजीनियरिंग की अन्य पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को दोषी ठहराया है. ईरानी सरकार का कहना है की, 29 बच्चों सहित कम से कम 234 प्रदर्शनकारियों सुरक्षा बलों की कार्यवाई में मारे गए हैं.

निलोफर हमीदी ने साझा की थीं तसवीरें

बताया जा रहा है की, निलोफर हमीदी महसा आमिनी (Mahsa Amini) की तसवीरें साझा करने वाले पहले पत्रकार थे. उनके तस्वीर साझा करते ही पूरे देश में विरोध की लहर दौड़ गयी थी. ना सिर्फ ईरान में बल्कि पूरी दुनिया में महसा अमिनी (Mahsa Amini) के लिए विरोध प्रदर्शन हो रहा था.

दूसरे पत्रकार इलाहे मोहम्मदी को 22 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था. बता दें की, पत्रकार इलाहे मोहम्मदी ने महसा अमिनी के अंतिम संस्कार की रिपोर्टिंग की थी. जिसके बाद से ईरानी सरकार उनको एक विदेशी एजेंट बता रही है. महसा अमिनी (Mahsa Amini) की मौत का विरोध प्रदर्शन ख़त्म होने की बजाए अब और उग्र होता जा रहा है.

दोनों पत्रकार थे एजेंट और विदेश से प्राप्त किया था प्रशिक्षण

ईरानी सरकार की माने तो उन्होंने कहा है की, दोनों पत्रकारों ने विदेशों से प्रशिक्षण प्राप्त किया था. लेकिन फ़िलहाल तो दोनों पत्रकारों के विदेश जाने की कोई बात सामने नहीं आई है. जानकारों का कहना है की दोनों पत्रकार विदेश गए ही नहीं थे. इस स्टेटमेंट के सामने आते ही ईरानी मीडिया सकपका गई है. बताया जा रहा है की अब तक 40 पत्रकारों को हिरासत में लिया जा चुगा है.

ईरान ने आरोप लगया है की, अमेरिका जैसे देश ही इनकी फंडिंग करते हैं. ईरान का कहना है की, अमेरिकन एजेंसी ऐसे लोगों को ईरान में खोजती हैं जो सरकार विरोधी हैं. और फिर उन्हें ईरान में अव्यस्था फ़ैलाने के लिए फण्ड देती हैं.

महसा आमिनी की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी. जिसके बाद से पूरे ईरान में सिर्फ और सिर्फ विरोध की लहर दिख रही है. ईरान के कई शहर ऐसे हैं जहाँ सरकार को इन्टरनेट सेवा पूरी तरह से बंद करनी पड़ी है. ताकि लोगो एक दूसरे से कम कनेक्ट हो और कम ईरान में अव्यस्था फैले. इसके साथ ही दुनिया भर में प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए महिलाएं अपने बाल काट रही हैं.

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