September 25, 2022
John Bolton: ट्रम्प के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन ने स्वीकार किया की उन्होंने...“तख्तापलट में की मदद”

John Bolton: ट्रम्प के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन ने स्वीकार किया की उन्होंने...“तख्तापलट में की मदद”

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John Bolton: संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के पूर्व राजदूत और व्हाइट हाउस (White House) के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन (John Bolton) ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि उन्होंने विदेशों में तख्तापलट की योजना बनाने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि 6 जनवरी 2021 के वॉशिंगटन (Washington) के दंगों के पीछे ऐसी कोई मंशा नहीं थी.

जॉन बोल्टन ने कहीं ये बातें

बोल्टन (John Bolton) ने साल 2018 से 2019 में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया. बता दें की, बोल्टन (John Bolton) ने कहा की, “6 जनवरी को हमारे लोकतंत्र पर हमला नहीं था. यह डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की कोशिश थी, अपने जैसे डोनाल्ड ट्रंपों को खोजने की. ऐसा जीवन में एक बार ही होता है.”

बोल्टन ने यह नहीं बताया कि उन्होंने कौन सी सरकारों को पलटने में मदद की. लेकिन उन्होंने इस बात का संकेत ज़रूर दिया की, वेनेजुएला में अमेरिकी सेना (American Army) के हस्तक्षेप की वकालत की थी. जॉन बोल्टन (John Bolton) को डोनाल्ड ट्रंप का काफ़ी करीबी भी माना जाता रहा है.

Aljazeera की ख़बर के मुताबिक, 2019 में एनएसए (NSA) के रूप में बोल्टन (John Bolton) ने सार्वजनिक रूप से वेनेजुएला (Venezuelan) के विपक्षी नेता जुआन गुएडो (Juan Guaido’s ) के समाजवादी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ( Nicolas Maduro) को हटाने के अपने प्रयास को वापस लेने के लिए सेना के आह्वान का समर्थन किया था.

डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करना है मुश्किल – बोल्टन

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, विदेश नीति विशेषज्ञों ने भी वाशिंगटन के अन्य देशों में हस्तक्षेप के इतिहास की आलोचना की है. वाशिंगटन ने हमेशा से ही हस्तक्षेप किया है चाहे फिर वो 1953 में तत्कालीन ईरानी प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की बात हो या फिर वियतनाम में युद्ध. बोल्टन ने अमेरिकी अधिकारियों का ज़िक्र डोनाल्ड ट्रम्प के ही परिपेक्ष में किया है.

उनका कहना है की, “लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के लिए विदेशों में अशांति फैलाने में उनकी भूमिका को खुले तौर पर स्वीकार करना बेहद असामान्य है.” बोल्टन की टिप्पणियों को ऑनलाइन बहुत सारी सुर्खियाँ मिल रहीं हैं. केन्या (Kenya) के एक बीबीसी पत्रकार डिकेंस ओलेवे ने ट्विटर पर लिखा है की, “जॉन बोल्टन, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के राजदूत सहित अमेरिकी सरकार में सर्वोच्च पदों पर काम किया है. उन्होंने लापरवाही से अन्य देशों में तख्तापलट की योजना बनाने में मदद की है.”

मार्क ओवेन जोन्स ने इसी मामले से अपनी बात को जोड़कर कहा की, “हर समाचार आउटलेट को इसे कवर करने की आवश्यकता है, इसलिए नहीं कि यह अपने आप में आश्चर्यजनक है. बल्कि इसलिए कि इसकी आवश्यकता है अमेरिका कैसे काम करती हैं, इस बारे में हर किसी की राजनीतिक शब्दावली का हिस्सा बनें.” जॉन बोल्टन (John Bolton) ने भारत को लेकर भी दो साल पहले टिप्पड़ी की थी जब भारत और चीन के रिश्ते ख़राब हुए थे.

उनका कहना था की, यदि भारत (India) और चीन (China) के बीच तनाव बढ़ता है, तो मुझे नहीं लगता कि डोनाल्ड ट्रंप भारत के समर्थन में आगे आएंगे. बोल्टन ने कहा था की, “मैं नहीं जानता कि नवंबर के चुनाव के बाद ट्रंप क्या करेंगे, लेकिन यदि वह सत्ता में वापस आते हैं, तो उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार और हांगकांग को लेकर चीन का विरोध नहीं करेंगे. इसके उलट वह चीन से बड़ी ट्रेड डील करेंगे, इसलिए यदि भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो मुझे नहीं लगता कि डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ खड़े होंगे”.

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