Jammu-Kashmir: गांदरबल जिले के एक व्यक्ति ने सदियों पुराने मिट्टी के घर बनाने का मिशन शुरू किया है, जिसे कश्मीर (Jammu-Kashmir) में बहुत पहले पसंद किया जाता था. मिटटी के ये घर कश्मीर की शान कहे जाते हैं. अब इस युवक ने फिर से कश्मीर में मिटटी के घर बनाने की ठानी है.

Jammu-Kashmir में देखने को मिलेंगे मिट्टी के घर

स्थाई मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के इतिहास और विरासत के साथ तालमेल बिठाते हुए, युवा अब घाटी में पारंपरिक व्यवसायों को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की घर बना रहा है. मिट्टी के घरों को जम्मू-कश्मीर की विरासत कहा जाता है.

एक युवा उद्यमी (entrepreneur) समीर अहमद है जिसने ‘कुलुबे कॉटेज’ का निर्माण किया है. जो अब पुरा कंगन (Pura Kangan) में स्थित गांदरबल के मध्य जिले में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घर बाहर से मिट्टी के बने हैं, और ये अंदर से एक होटल की सभी सुविधाओं से लैस हैं.

गांदरबल के शख्स ने Jammu-Kashmir में सदियों पुरानी मिट्टी के घर बनाने का शुरू किया मिशन
गांदरबल के शख्स ने Jammu-Kashmir में सदियों पुरानी मिट्टी के घर बनाने का शुरू किया मिशन

अहमद ने कहा कि उन्होंने तीन मिट्टी के घर बनाए हैं और ऐसा करने का विचार उन्हें लंबे समय से है. उनका कहना है की यह  विचार उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिड-हाउस पुराने अंदाज के रहन-सहन के साथ-साथ माहौल का अहसास कराते हैं. जबकि इंटीरियर में आधुनिक सुविधाएं पर्यटकों के लिए कोई मुश्किल पैदा नहीं करती हैं. ये कॉटेज बहुत ही आर्म दायक हैं.

कश्मीर (Jammu-Kashmir) की सरल और अनोखी जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुए समीर ने कहा कि “प्राचीन काल में घर मिट्टी के बने होते थे और लोग विभिन्न प्रयोजनों के लिए पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते थे. हालांकि, आधुनिक समय में, लोगों के जीवन के तरीके में बहुत सारे बदलाव हुए हैं.”

पुराने तरीके को पुनर्जीवित करेंगे ये मिट्टी के घर

समीर अहमद ने कहा कि कुलुबे कॉटेज जीवन के इस पुराने तरीके को पुनर्जीवित करने की एक कड़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, कुलुबे कॉटेज में मिट्टी के घरों के साथ-साथ एक रेस्तरां भी है. जिसमें मिट्टी के बर्तनों का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है.

समीर अहमद ने कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों के आवास के लिए ऐसे और मिट्टी के घर बनाने की योजना बना रहे हैं. एक पर्यटक ने मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में बताया की वहां का वातावरण बहुत शुद्ध है. इसके साथ उनका अपना पुराना जीवन याद आ गया की किस तरह वो अपने गाँव में समय व्यतीत करते थे.

पर्यटक ने घाटी के युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए अभूतपूर्व काम कर रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से युवाओं को समर्थन देने का भी आह्वान किया.

वैसे तो समीर का कहना है की ये मिटटी के घर मजबूत हैं. लेकिन बीते महीने जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के अनंतनाग जिले में मिट्टी के मकान के ढहने से तीन लोगों की मौत हो गई थी. हालाँकि, ये घर समीर द्वारा निर्मित नहीं थे. ये अनंतनाग जिले में रहने वाले परिवार का अपना घर था. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी और जिला प्रशासन को तत्काल सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया था.

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