आज ISRO लॉन्च करने जा रहा देश का पहला प्राइवेट रॉकेट Vikram-S

ISRO: भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपना पहला रॉकेट सुबह 11:30 बजे अंतरिक्ष में लॉन्च किया है. विक्रम-एस रॉकेट, विक्रम-श्रृंखला का पहला श्रीहरिकोटा में इसरो (Indian Space Research Organisation) के लॉन्चपैड से उड़ान भरी है. यह भारत में होने वाला पहला निजी रॉकेट प्रक्षेपण है.

ISRO को मिलने जा रही एक और उपलब्धि

हिंदुस्तान टाइम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) शुक्रवार को एक निजी कंपनी द्वारा निर्मित देश का पहला रॉकेट लॉन्च करने के लिए तैयार है. घोषणा करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि निजी रॉकेट, विक्रम-सबऑर्बिटल (वीकेएस) का पहला प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश से 11.30 बजे होगा.

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि, “इसरो (ISRO) शुक्रवार को इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार है. ISRO ने स्वतंत्र भारत की 75 साल की यात्रा में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए पहला निजी रॉकेट लॉन्च किया.”

Vikram-S एक सबऑर्बिटल वाहन है

बता दें की, विक्रम एस (Vikram-S) एक सबऑर्बिटल वाहन है जिसे एक निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया गया है. बेंगलुरु टेक समिट 2022 में ‘आरएंडडी ऑफ इंडिया- इनोवेशन फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट’ सत्र को संबोधित करते हुए एस. सोमनाथ (जनवरी 2022 में के. सिवन के बाद सोमनाथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष चुने गए हैं) ने कहा है की,

आज ISRO लॉन्च करने जा रहा देश का पहला प्राइवेट रॉकेट Vikram-S
आज ISRO लॉन्च करने जा रहा देश का पहला प्राइवेट रॉकेट Vikram-S

“इसरो ने कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसमें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और निर्माण प्रक्रियाओं को शुरू से अंत तक शामिल करना शामिल है.100 स्टार्टअप हमारे साथ पंजीकृत हैं और अंतरिक्ष क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं.”

ISRO के अध्यक्ष ने कहीं ये बातें

उन्होंने कहा कि कई कंपनियों में अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़े खिलाड़ी बनने की क्षमता है और इसरो उन्हें वांछित प्रौद्योगिकियों (desired technologies) के निर्माण में सुविधा प्रदान कर रहा है. संगठन के साथ पंजीकृत 100 स्टार्टअप में से कम से कम 10 उपग्रह और रॉकेट विकसित करने पर काम कर रहे हैं.

इस कार्यक्रम में, सोमनाथ ने घोषणा की कि चंद्रयान 3 मिशन कुछ महीनों में कक्षा में होगा. यह कहते हुए कि इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन (National Aeronautics and Space Administration-NASA) के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष पर्यटन ने दुनिया में स्टार्ट-अप के साथ विभिन्न अनुप्रयोगों में रुचि दिखाई है. जो हमारी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को प्रभावित करते हैं.”

कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है ISRO

देश भर में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और स्मार्ट निर्माण प्रक्रियाओं में ISRO के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, सोमनाथ ने कहा की, “इसरो जिन कुछ क्षेत्रों पर काम कर रहा है. उनमें उपग्रह प्रौद्योगिकी को वापस लाना, इंजन निर्माण में उपयोग की जाने वाली प्रणोदन प्रणाली शामिल है. जिनका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है.”

आगे उन्होंने कहा है की, “हरित और संकर प्रणोदन प्रणाली, परमाणु प्रणोदन, योज्य प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, कार्यात्मक सामग्री, कार्बन फाइबर प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकियों, एन्क्रिप्शन और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों में उपयोग की जाने वाली क्वांटम प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ छोटे रॉकेटों का प्रक्षेपण भी शामिल है.”

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