इस्लाम देश भी Taliban के महिलाओं के यूनिवर्सिटी ना जाने के फैसले से हुए नाराज़

Taliban: तुर्की और सऊदी अरब ने निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में भाग लेने वाली महिलाओं पर तालिबान (Taliban) के देशव्यापी प्रतिबंध की कड़ी निंदा की है. तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुट कावुसोग्लू ने गुरुवार को कहा कि प्रतिबंध न तो इस्लामी और न ही मानवीय है. हम तालिबान (Taliban) के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं.

Taliban की दुनिया भर में हो रही निंदा

NDTV से मिली जानकारी के मुताबिक, अपने यमनी समकक्ष के साथ एक संयुक्त समाचार सम्मेलन में बोलते हुए तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुट कावुसोग्लू ने तालिबान (Taliban) से निर्णय को उलटने का आग्रह किया है.

तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुट कावुसोग्लू ने कहा की, “महिला शिक्षा में क्या बुराई है? इससे अफगानिस्तान को क्या नुकसान होता है? क्या कोई इस्लामी स्पष्टीकरण है? इसके विपरीत हमारा धर्म इस्लाम शिक्षा के विरुद्ध नहीं है. इसके विपरीत यह शिक्षा और विज्ञान को प्रोत्साहित करता है.”

सऊदी ने भी तालिबान को लगाई फटकार

सऊदी विदेश मंत्रालय ने अफगान महिलाओं को विश्वविद्यालय शिक्षा से वंचित किए जाने पर आश्चर्य और खेद व्यक्त किया है. बुधवार देर रात एक बयान में सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय सभी इस्लामी देशों में आश्चर्यजनक था.

इस्लाम देश भी Taliban के महिलाओं के यूनिवर्सिटी ना जाने के फैसले से हुए नाराज़
इस्लाम देश भी Taliban के महिलाओं के यूनिवर्सिटी ना जाने के फैसले से हुए नाराज़

तालिबान (Taliban) के उच्च शिक्षा मंत्री ने गुरुवार को कहा कि, “अफगान विश्वविद्यालयों को महिलाओं के लिए सीमा से बाहर घोषित कर दिया गया है. क्योंकि महिला छात्र उचित ड्रेस कोड सहित निर्देशों का पालन नहीं कर रही थीं.” इस सप्ताह की शुरुआत में घोषित प्रतिबंध पिछले साल अगस्त में सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर दूसरा प्रतिबंध है.

कई हाई-प्रोफाइल हस्तियाँ तालिबान के फैसले के विरोध में उतरी हैं

बता दें की, दुनिया भर में तालिबान (Taliban) का आलोचना हो रही है. मुस्लिम राष्ट्र भी अब तालिबान की खिलाफत कर रहे हैं. न सिर्फ नेता बल्कि कई हाई-प्रोफाइल क्रिकेटरों ने भी सोशल मीडिया पर इस फैसले की निंदा की है. राष्ट्रीय टीम के पूर्व कप्तान राशिद खान ने ट्वीट कर महिलाओं को समाज की नींव बताया है. उन्होंने लिखा, “एक समाज जो अपने बच्चों को अज्ञानी और अशिक्षित महिलाओं के हाथों में छोड़ देता है. वह अपने सदस्यों से सेवा और कड़ी मेहनत की उम्मीद नहीं कर सकता है.”

दो दशक पहले अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन द्वारा सत्ता से हटाए जाने के बाद तालिबान ने अगस्त 2021 में देश पर नियंत्रण वापस ले लिया था. जिसके बाद से अफ़ग़ानिस्तान में तबाही मची हुई है. महिलाओं पर कई तरीके के कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में पहले नहीं थे ऐसे सख्त कानून

कहा जाता है की इसके पहले तालिबान के सत्ता से हटाए जाने के बाद अफ़ग़ान समाज, जबकि बड़े पैमाने पर पारंपरिक, ने लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा को तेजी से अपनाया था. शुरुवात में तालिबान ने महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए अधिक उदार शासन का वादा किया था.

लेकिन तब से धार्मिक कानून की अपनी सख्त व्याख्या को लागू किया है.सत्ता वापस लेने के बाद से तालिबान लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से प्रतिबंधित कर दिया है. और महिलाओं को रोजगार के ज्यादातर क्षेत्रों से प्रतिबंधित कर दिया है. महिलाओं के पार्क और जिम में जाने पर भी पाबंदी है.

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