Indonesia: इंडोनेशिया का क्रिमिनल कोड क्यों बना विवादास्पद

Indonesia: इंडोनेशिया के क्रिमिनल कोड(Criminal Code) का ड्राफ्ट अब और विवादास्पद होता जा रहा है. बता दें की, कानून का एक नया संस्करण अगले महीने पारित किया जा सकता है, लेकिन सरकार ने बदलावों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है. सरकार की तरफ़ से जुलाई में कानून के पारित होने के संकेत मिले हैं.

जुलाई में हो सकता है कानून पारित

इंडोनेशिया(Indonesia) एक बार फिर संभावित कानूनी संकट का सामना कर रहा है. क्योंकि इसके विवादास्पद अपराधिक कोड(Criminal Code) के प्रारूप के पारित होने के संभावनाएँ और हो गई हैं. Aljazeera की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में नए कोड के मसौदे को सार्वजनिक किया गया, जिसके बाद पूरे देश में प्रदर्शन भी  हुए थे. जिनमें से कुछ बहुत ज्यादा हिंसक हो गए थे.

इंडोनेशियाई कई लेखों के बारे में चिंतित थे. ईशनिंदा से लेकर व्यभिचार तक और चिंतित थे कि कुछ प्रावधानों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार बनाया जाएगा और नागरिक स्वतंत्रता पर रोक लगाई जाएगी. ह्यूमन राइट्स वॉच इंडोनेशिया के एक शोधकर्ता एंड्रियास हार्सोनो(Andreas Harsono) ने अल जज़ीरा(Aljazeera) को बताया की, “इंडोनेशिया का मसौदा आपराधिक कोड इस्लामवाद के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है क्योंकि कई इस्लामवादी इसे शरिया कानून का ताज मानते हैं.”

क्रिमिनल कोड का ड्राफ्ट क्या है

बता दें की, क्रिमिनल कोड वर्तमान इंडोनेशियाई आपराधिक कोड में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखता है. वर्तमान आपराधिक संहिता, जो डच औपनिवेशिक काल के दौरान 1918 की है, को इंडोनेशियाई स्वतंत्रता के बाद 1946 में संहिताबद्ध और एकीकृत किया गया था. यह नागरिक कानून प्रणाली पर आधारित है और डच कानून, हुकुम अदत के रूप में जाना जाने वाला प्रथागत कानून और आधुनिक इंडोनेशियाई कानून का मिश्रण है, जिसे वर्षों से जोड़ा गया है.

मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान कोड में परिवर्तन और कानून के विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित बिलों के परिवर्धन के परिणामस्वरूप हैं. जैसे कि घरेलू हिंसा विधेयक और स्वास्थ्य कानून, वर्तमान कोड के विरोधाभासी हैं. कोड को रीफ्रेश करने की प्रक्रिया 10 साल से अधिक समय पहले शुरू हुई थी और कई अलग-अलग प्रशासनों द्वारा संचालित की गई है. 

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