Indian rupee: भारतीय रुपये में और गिरावट आने के संकेत, प्रति अमेरिकी डॉलर 80 छूने को है तैयार

Indian rupee: रूपये के गिरने का सिलसिला लगातार चालू है. बता दें की, मंगलवार को अमेरिकी (America) मुद्रा के मुकाबले रुपया (Indian rupee) 14 पैसे टूटकर 79.59 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ है. बता दें की, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया के ऐतिहासिक निचले स्तर पर जाने के साथ, विश्लेषकों ने भविष्यवाणी की है कि स्थानीय मुद्रा अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 80 रुपये के स्तर को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है.

भारतीय मुद्रा को करना पड़ रहा भयंकर नुकसान का सामना

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, पिछले चार से पांच दिनों से, भारतीय मुद्रा (Indian rupee) को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सुरक्षित पनाहगाह अमेरिकी डॉलर की तलाश में भारतीय इक्विटी (Equity) को डंप करना जारी रखा है. जिससे स्थानीय मुद्रा पर और दबाव पड़ा है. बता दें की, वर्ष की शुरुआत में, रुपया-डॉलर विनिमय दर 74 पर था. लेकिन मंदी की आशंका, यूक्रेन पर रूसी युद्ध (Russia-Ukraine War)  और तेल, गैस की कीमतों में वृद्धि ने रुपये पर जबरदस्त दबाव डाला है.

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में रूस और यूक्रेन के बाद से मुद्रा 26 बार नए रिकॉर्ड निम्न स्तर तक गिर गई है. विश्लेषकों का मानना ​​है कि रुपया-डॉलर की विनिमय दर निश्चित रूप से 80 को छू जाएगी. बता दें की, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि संयुक्त राज्य फेडरल रिजर्व महीने के अंत में ब्याज दरों में 75 से 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी करेगा.

ICICI के डायरेक्टर ने दिया ये बयान

आईसीआईसीआई (ICICI) डायरेक्ट ने एक बयान में कहा है की, “वैश्विक बाजारों में मजबूत डॉलर और जोखिम से बचने के बीच आज (गुरुवार) रुपये में गिरावट की उम्मीद है. बाजार की भावनाओं को चोट लगी है क्योंकि यूएस में लाल गर्म मुद्रास्फीति ने दांव लगाया है. यूएस फेड ब्याज दरों की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ा सकता है. यहाँ तक की 100 बीपीएस भी. इसके अतिरिक्त, मंदी की वजह से भी रूपये को चोट पहुँच सकती है.”

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार (Dilip Parmar) ने कहा है की, ” रुपये में स्थिरता लाने के लिए सोमवार को सीमापार निपटान रुपये में करने के रिजर्वबैंक के उपाय के बावजूद भी भारतीय मुद्रा आज एक और रिकॉर्ड निम्न स्तर को छू गई है. उनका कहना है की मंदी की वजह से डॉलर को समर्थन मिल रहा है.” विश्लेषकों का मानना है की अगर ऐसा ही चलता रहा तो रूपये और ज्यादा कमज़ोर होता चला जाएगा. इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

करेंसी की कीमत कैसे होती है तय

वैसे तो करेंसी के उतार-चढ़ाव के कई कारण होते हैं. डॉलर (Dollar) की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी (Currency) की वैल्यू घटे तो इसे उस करेंसी का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं. इसको करेंसी डेप्रिशिएशन (currency depreciation) भी कहते हैं. हर देश के पास विदेशी मुद्रा का भंडार होता है. जिससे वह अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करता है. इसके साथ ही इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है.

WION के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के समक्ष डॉलर (Dollar) की मजबूती को आंकने वाला डॉलर सूचकांक 0.48 प्रतिशत बढ़कर 108.54 अंक पर पहुंच गया.

 

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