September 25, 2022
Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था 13.5 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन अपने निर्धारित लक्ष्य को नहीं छू पाई

Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था 13.5 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन अपने निर्धारित लक्ष्य को नहीं छू पाई

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Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में एक साल पहले की तुलना में अप्रैल-जून तिमाही में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. एक वर्ष में सबसे तेज गति इस तिमाही में विकास के तेजी से धीमा होने और अगले दो के रूप में उच्च ब्याज दरों में गतिविधि की आशंकाओं के बीच.

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलीं ये बातें

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि और विनिर्माण में वृद्धि के कारण उछाल आया, क्योंकि महामारी पर अंकुश लगा है.

रॉयटर्स पोल में अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में सकल घरेलू उत्पाद अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत बढ़ेगा. जबकि पिछली तिमाही में यह 4.1 प्रतिशत था.

वृद्धि में स्पष्ट रूप से बड़ी उछाल, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में दर्ज की गई 20.1 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से कम है. पिछली तिमाही के निम्न आधार के कारण है और अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि इस तिमाही में वृद्धि के बाद मंदी हो सकती है.

केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा की, “आगे बढ़ते हुए वैश्विक बाधाओं के साथ भारत के बाहरी क्षेत्र को एक चुनौतीपूर्ण समय का सामना करना पड़ेगा.” आगे उन्होंने कहा की,

“घरेलू खपत और निवेश को गति देने के लिए यह महत्वपूर्ण होगा. कमजोर ग्रामीण मांग के साथ अब तक खपत मांग में सुधार असमान रहा है. जहां मुद्रास्फीति में कमी समग्र खपत खर्च को समर्थन प्रदान करेगी. वहीं असमान मानसून ग्रामीण मांग के लिए खराब होगा.”

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का ये था पूर्वानुमान

बता दें की, जुलाई में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अप्रैल में शुरू होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के लिए अपने विकास पूर्वानुमान को 8.2 प्रतिशत से संशोधित कर 7.4 प्रतिशत कर दिया. संशोधन के बावजूद भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा.

अप्रैल-जून तिमाही में दो अंकों की वृद्धि ऐसे समय में हुई है. जब वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में है, अधिकांश देश उच्च मुद्रास्फीति का सामना कर रहे हैं. कीमतें बढ़ रही हैं क्योंकि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण जारी है. जिससे ऊर्जा और भोजन की कीमतों में वृद्धि हुई है.

भारतीय अर्थव्यवस्था एक महामारी से प्रेरित मंदी से उबर रही थी. जब जनवरी में शुरू होने वाले ओमाइक्रोन-ईंधन वाले कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि ने अधिकारियों को कुछ वायरस से संबंधित प्रतिबंधों को वापस लाने के लिए प्रेरित किया.

बाकी देशों के मुकाबले भारत की है बेहतर ग्रोथ

बाकी देशों ने भी कोरोना के समय बहुत कुछ खोया है. कोरोना ने सबकी अर्थव्यवस्था पर असर डाला है. लेकिन बता दें की, कोरोना महामारी के बाद से भारत जैसी ग्रोथ किसी देश की नहीं हुई है. अमेरिका तक की इकॉनमी तेज़ी से नीचे आ रही है. अगर समय रहते अमेरिका ने सुधार नहीं किया तो उसको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

अमेरिका के अलावा यूरोप के देश भी ज्यादा अच्छी ग्रोथ नहीं कर रहे हैं. एशिया में चीन से लेकर पाकिस्तान तक सभी की अर्थव्यवस्था डामा डोल है. वहीँ पाकिस्तान में भी अर्थव्यस्था ने कहर मचा रखा है. पाकिस्तान की हालत तो यह है की कोई उसको लोन देने के लिए भी नहीं तैयार है.

 

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