September 25, 2022
India: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने बताया की, भारत ने कुपोषण दर में सुधार के लिए तेजी से उठाए हैं कदम

India: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने बताया की, भारत ने कुपोषण दर में सुधार के लिए तेजी से उठाए हैं कदम

Spread the love

India: संयुक्त राष्ट्र की ख़बर भारत (India) के पक्ष में अच्छी आई है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने हाल ही में कहा कि भारत (India) ने कुपोषण दर (malnutrition rates) में सुधार के लिए तेजी से कदम उठाए हैं और कहा कि 2006 और 2016 के बीच देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग 48 प्रतिशत से घटकर 38 प्रतिशत हो गया है. जहाँ एक तरफ़ भारत के पड़ोसी देशों में हाहाकार मचा है वही भारत सुधार की ओर प्रगति कर रहा है.

कुपोषण दर में सुधार के लिए भारत की स्थिति सकारात्मक

ANI की ख़बर के अनुसार, सरकार के पास बड़े खाद्य सुरक्षा और गरीबी विरोधी कार्यक्रम हैं. खाद्यान्न उत्पादन में पांच गुना वृद्धि हुई है. इसके साथ ही 1950-51 में 50 मिलियन टन से बढ़कर 2014-15 में लगभग 250 मिलियन टन हो गया है.

भारत एक शुद्ध खाद्य निर्यातक बनने के लिए खाद्य सहायता पर निर्भरता से दूर हो गया है. खबरों के मुताबिक, 2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए थे.

ये विशेष रूप से बारिश पर आधारित क्षेत्रों में अधिक कृषि उत्पादकता के लिए बाधाओं को दूर करने के लिए किया गया था. बड़े पैमाने पर सिंचाई और 2017 तक देश के सकल सिंचित क्षेत्र को 90 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 103 मिलियन हेक्टेयर करने के लिए मिट्टी और जल संचयन (Water Harvesting) कार्यक्रम भी सरकार के द्वारा शुरू किए गए थे.

इसके साथ ही इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), तिलहन, दलहन, ताड़ के तेल और मक्का पर एकीकृत योजनाएं (आईएसओपीओएम), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-मार्केटप्लेस ये सब भी शामिल हैं. सरकार ने भारत (India) में ही खेती के लिए किसानों को कई चीज़े उपलब्ध कराईं हैं.

पिछले दो दशकों से सरकार उठा रही ये कदम

सरकार ने पिछले दो दशकों में कुपोषण से निपटने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. जैसे स्कूलों में मध्याह्न भोजन की शुरुआत की. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को राशन प्रदान करने के लिए आंगनवाड़ी प्रणाली शुरू की. और नीचे रहने वालों के लिए रियायती अनाज दिया.

बता दें की, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 का उद्देश्य अपनी संबद्ध योजनाओं और कार्यक्रम के माध्यम से सबसे कमजोर लोगों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

जिससे भोजन तक पहुंच हर व्यक्ति का कानूनी अधिकार बन जाए. भारत (India) में जुड़ी हुई पोषण और आजीविका चुनौतियों का समाधान करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कमजोर समूह पीछे न रहें, संयुक्त राष्ट्र प्राथमिकता समूह (UN priority group partners) सरकार के साथ पोषण सेवाओं को बढ़ाने और भोजन और देखभाल प्रथाओं में सुधार करने के लिए हमेशा ही भागीदार रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि, “यह समूह गरीबी-विरोधी कार्यक्रमों, विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कृषि और आजीविका आयामों को मजबूत करने के लिए सहायता प्रदान करता है.” पिछले वर्षों में, समूह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर गेहूं के आटे की किलेबंदी पर एक राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published.