India-China: भारत की बढ़ी चिंता, श्रीलंकाई बंदरगाह पर चीनी ट्रैकिंग जहाज ने दी दस्तक

India-China: चीनी शोध पोत युआन वांग 5 को श्रीलंका सरकार ने हंबनटोटा बंदरगाह पर आने की अनुमति दे दी है. युआन वांग 5, बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज को हंबनटोटा बंदरगाह पर इस शर्त पर डॉक करने की अनुमति दी गई थी कि यह श्रीलंकाई जल में कोई शोध नहीं करेगा.

भारत के लिए है ये खतरे का निशान

अधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत (India-China) ने जहाज के ट्रैकिंग सिस्टम द्वारा दक्षिणी क्षेत्र में भारतीय प्रतिष्ठानों की जासूसी करने की कोशिश की संभावना पर चिंता जताई थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पहले कहा था, “हमें चीनी पोत द्वारा अगस्त में हंबनटोटा की प्रस्तावित यात्रा की रिपोर्ट की जानकारी है.”

उन्होंने आगे कहा की, “सरकार भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़े किसी भी विकास की सावधानीपूर्वक निगरानी करती है और उनकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाती है.” पिछले हफ्ते, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि “कुछ देशों के लिए श्रीलंका पर दबाव बनाने के लिए तथाकथित सुरक्षा चिंताओं का हवाला देना पूरी तरह से अनुचित था.”

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, “हम संबंधित पक्षों से चीन की समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान गतिविधियों को तर्कसंगत रूप से देखने और चीन और श्रीलंका के बीच सामान्य आदान-प्रदान और सहयोग को बाधित करने से रोकने का आग्रह करते हैं.”

श्रीलंका ने 12 जुलाई की दी थी मंजूरी

12 जुलाई को श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने हंबनटोटा बंदरगाह पर जहाज के डॉकिंग के लिए मंजूरी दी थी. 8 अगस्त को मंत्रालय ने कोलंबो में चीनी दूतावास को लिखे एक पत्र में जहाज के नियोजित डॉकिंग को स्थगित करने का अनुरोध किया था.

जानकारी के लिए बता दें की, चीन का ये जहाज 16 से 22 अगस्‍त तक हंबनटोटा में रहेगा. भारत के ओडिशा राज्‍य में अक्‍सर सेना के लिए एडवांस्‍ड मिसाइल के टेस्‍ट किए जाते हैं. इस जगह से श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट करीब 470 किलोमीटर दूर है.

जहाज इतना शक्तिशाली है कि बैलेस्टिक मिसाइल तक को ट्रैक कर सकता है. इस वजह से भारत की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर खासी चिंता जताई जा चुकी है. भारत के लिए इस जहाज को खतरे के रूप में देखा जा रहा है.

इतने रूपये का चीन ने किया है निवेश

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका में कई इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के नाम पर निवेश किया हुआ है. जिस हंबनटोटा पोर्ट पर चीन अपने कदम मजबूत करता जा रहा है, उसके लिए उसने 1.4 बिलियन डॉलर निवेश किए हैं.

बता दें की, चीन और भारत के रिश्ते इस वक़्त ठीक नहीं है. बीते दो सालों से लद्दाख के इलाके को लेकर भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच तनाव बना हुआ है. इस बीच चीन का ये जहाज भारत के लिए चिंता का सवाल बनता है. उधर श्रीलंका की माली हालत से हर कोई वाकिफ है. श्रीलंका में बीते समय से आर्थिक स्थिति बुरी तरह से डूब गई है.

ऐसा माना जा रहा है की चीन अब अपनी योजना श्रीलंका पर थोप कर उसको अपने कब्ज़े में लेना चाहता है. जिस तरह से चीन (India-China) ने पाकिस्तान को क़र्ज़ देकर उसको अपने जाल में फँसा लिया था.

अधिकारिक ट्वीट…

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