India-Bhutan: पीएम मोदी ने की भूटान नरेश से मुलाकात, दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर हुई वार्ता

India-Bhutan: भारत और भूटान के बीच घनिष्ठ संबंधों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में भूटान के महामहिम राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ मुलाकात के दौरान भारत और भूटान के बीच घनिष्ठ और अनूठी दोस्ती को और मजबूत करने के लिए विभिन्न विचारों पर चर्चा की.

भारत और भूटान के रिश्ते होंगे मजबूत

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा की,

“भूटान के महामहिम नरेश के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की. घनिष्ठ और अद्वितीय भारत-भूटान मित्रता को और मजबूत करने के लिए विभिन्न विचारों पर चर्चा की. भारत और भूटान के बीच मजबूत संबंधों की सराहना करते हुए उन्होंने हमारे संबंधों को आकार देने में लगातार ड्रुक ग्यालपोस द्वारा मार्गदर्शक दृष्टिकोण के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त की.”

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-भूटान (India-Bhutan) मित्रता को और मजबूत करने के लिए विभिन्न विचारों पर चर्चा की. इसके अलावा पीएम मोदी ने भारत और भूटान के बीच संबंधों को आकार देने में लगातार ड्रुक ग्यालपोस द्वारा प्रदान किए गए मार्गदर्शक दृष्टिकोण के लिए भी अपनी प्रशंसा व्यक्त की है. बता दें की, वांगचुक ने यात्रा के दौरान विदेश सचिव विनय क्वात्रा से भी मुलाकात की. भूटान ने मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन रूपरेखा समझौते की पुष्टि की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट कर के कहीं ये बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, “भारत में भूटान (India-Bhutan) के राजदूत मेजर जनरल वेटसॉप नामग्याल ने डीजी इंटरनेशनल सोलर अलायंस की मौजूदगी में सचिव ईआर दम्मू रवि को अनुसमर्थन का दस्तावेज सौंपा.”

भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंधों का मूल ढांचा दोनों देशों के बीच 1949 में हस्ताक्षरित मैत्री और सहयोग की संधि थी. इसने दोनों देशों के बीच शांति और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आह्वान किया. इसको सन् 2007 में संधि को संशोधित किया गया था.

राजनयिक संबंध 1968 में थिम्पू में भारत के एक विशेष कार्यालय की स्थापना के साथ स्थापित किए गए थे. भारत और भूटान के बीच सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, व्यापार, पारगमन, आर्थिक, जल विद्युत, विकास सहयोग, जल संसाधन आदि जैसे क्षेत्रों में कई संस्थागत और राजनयिक तंत्र हैं.

भूटान चार भारतीय राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ 699 किमी की लंबाई के साथ अपनी सीमा साझा करता है और भारत और चीन के बीच एक बफर के रूप में कार्य करता है.

भारत ने भूटान में तीन जलविद्युत परियोजनाओं  का किया है निर्माण

जानकारी के लिए बता दें की, भूटान भारत के लिए एक बफर राज्य के रूप में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चिकन नेक कॉरिडोर की रक्षा करके चीन के खिलाफ रक्षा के रूप में कार्य करता है. इसके अलावा, डोकलाम गतिरोध ने भारत के लिए भूटान के रणनीतिक महत्व को फिर से स्थापित किया.

दोनों देशों के बीच व्यापार 1972 के भारत-भूटान व्यापार और पारगमन समझौते द्वारा शासित है. भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. भारत ने भूटान में तीन जलविद्युत परियोजनाओं (HIP) का निर्माण किया है. चुखा एचईपी, कुरिचु एचईपी, और ताला एचईपी, परिचालन और भारत को अधिशेष बिजली का निर्यात.

हाल ही में, भारत ने 720 मेगावाट की मंगदेछू जलविद्युत परियोजना पूरी की और दोनों पक्ष 1200 मेगावाट पुनात्सांगछु-1 और 1020 मेगावाट पुनात्सांगछु-2 सहित अन्य चल रही परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी ला रहे हैं. विशेष रूप से भूटान भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के तहत कोविशील्ड टीके प्राप्त करने वाला पहला देश है.

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