दुनिया भर के Sanction हुए बेअसर, India बना रूसी तेल का शीर्ष आयातक

India: अमेरिका रूस के खिलाफ हमेशा से रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका और रूस के बीच दूरियां और बढ़ गयी हैं. पश्चिमी देश लगातार रूस से कारोबार नहीं करने का दबाव भी बना रहे हैं.

लेकिन इधर अमेरिका का दबाव थोड़ा कम हो गया है. कुछ वक़्त पहले अमेरिका ने सीधे तौर पर इस बात का खंडन किया था और कहा था की भारत (India) और चीन की वजह से ही रूस पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ा है.

India नहीं डरता किसी से, अब पाकिस्तान भी भारत की कर रहा कॉपी

WION से मिली जानकारी के मुताबिक, अब भारत (India) के बाद पाकिस्तान भी थोड़ी दम दिखा रहा है. भारत (India) और रूस के रिश्ते के बाद से अब पाकिस्तान भी रूस से अपने रिश्ते मजबूत करना चाहता है. अब पाकिस्तान छूट पर रूस से ऊर्जा आपूर्ति की मांग कर रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस तिमाही में और ज्यादा रूसी क्रूड आयात करने पर विचार कर सकता है

अमेरिका के एक प्रवक्ता ने कहा है कि, “रूसी ऊर्जा आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय अलग-अलग देशों पर छोड़ दिया गया है. उम्मीद है कि वे अपनी परिस्थितियों के आधार पर उचित निर्णय लेंगे.” अमेरिका के प्रवक्ता ने आगे कहा, “हम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर यूक्रेन के खिलाफ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आक्रामकता के युद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए भारत (India) और यूरोपीय सहयोगियों और भागीदारों सहित सहयोगियों और भागीदारों के साथ कोआर्डिनेट करते रहेंगे.”

दुनीया भर की धमकियाँ हुई बेअसर, India बना रूसी तेल का शीर्ष आयातक
दुनीया भर की धमकियाँ हुई बेअसर, India बना रूसी तेल का शीर्ष आयातक

अक्टूबर में भारत के रूसी तेल के आयात में हुई है वृद्धि

इस बीच, अक्टूबर में भारत के रूसी तेल के आयात में वृद्धि हुई है. जिससे यह अब तक का सबसे अधिक आयात हुआ है. एनर्जी कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्स के अनुसार, मास्को ने अक्टूबर में भारत को कच्चे तेल की 935,556 बैरल प्रति दिन (BPD) की आपूर्ति की है.

रूस जितना कच्चा तेल बनाता है उसमें से अब भारत (India) को कुल 22 प्रतिशत आयात करता है.  रूस इराक के 20.5 प्रतिशत और सऊदी अरब के 16 प्रतिशत कच्चा तेल देता है. बता दें की, रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले, रूस ने दिसंबर 2021 में भारत को प्रति दिन केवल 36,255 बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति की थी. जबकि इराक ने 1.05 मिलियन BPD और सऊदी अरब ने 952,625 रुसी तेल का निर्यात किया था.

व्लादिमीर पुतिन ने चली थी यह चाल

रूसी तेल के भारतीय आयात में वृद्धि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हुई है. कहा जाता है की, जैसा ही पश्चिम ने रूसी ऊर्जा आपूर्ति को रोकने की कोशिश की, व्लादिमीर पुतिन ने सस्ते में तेल बेचकर एशियाई देशों को लुभाने की कोशिश की है. इस ऑफर का भारत (India) और चीन ने सबसे ज्यादा लाभ उठाया है. और दोनों ही रुसी तेल के सबसे बड़े उपभोक्ता बन गए हैं.

अधिकारिक रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया है की, भारत अपनी 85 फीसदी पेट्रोलियम जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. पश्चिमी प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है. जिससे भारत को अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस का रास्ता चुनना पड़ा है.

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