झारखंड के सीएम Hemant Soren ने विधानसभा में जीता विश्वास मत

Hemant Soren: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोमवार को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया और गृहयुद्ध का माहौल बनाने और चुनाव जीतने के लिए दंगे भड़काने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की खिंचाई की.

विधानसभा में सीएम सोरेन ने किया इन बातों का जिक्र

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार के सामने बाधाओं को पेश किए जाने का जिक्र करते हुए सोरेन ने विधानसभा में कहा, जिस तरह से हमारी सरकार के सामने बाधाएं पेश की जा रही हैं. हमारे तीन विधायक बंगाल में हैं. बंगाल में अवैध शिकार (विधायकों की) की जिम्मेदारी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर है. वे इसकी जांच के लिए उन राज्यों में जाने वाली पुलिस के साथ सहयोग नहीं करते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि जब तक राज्य में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार है. तब तक भाजपा की साजिश सफल नहीं होगी. विपक्षी भाजपा द्वारा पैदा की गई राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सोरेन ने सोमवार को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया. झारखंड के सीएम ने आगे कहा की,

“वे एक ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं. जहां दो राज्य एक-दूसरे के खिलाफ हों. वे गृहयुद्ध का माहौल बनाना चाहते हैं और चुनाव जीतने के लिए दंगे भड़काना चाहते हैं. जब तक यहां यूपीए की सरकार है. ऐसे प्लॉट नहीं बचेंगे. आपको करारा राजनीतिक जवाब मिलेगा.”

ये था पूरा मामला

बता दें की, एक दिन पहले विधायक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दिन बिताने के बाद रांची वापस चले गए. सूत्रों ने बताया कि रायपुर जाने वालों में कांग्रेस के 13 और झामुमो के 18 विधायक शामिल हैं. सोरेन ने बीती रात विधायकों से सर्किट हाउस में मुलाकात की थी.

जहां उन्होंने रात बिताई थी. विशेष रूप से झारखंड में एक राजनीतिक संकट पैदा हो गया जब भाजपा ने एक याचिका में लाभ के पद के मामले में सोरेन को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग की.

भाजपा ने सोरेन (Hemant Soren) को एक विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने 2021 में राज्य खनन विभाग के दौरान खुद को खनन पट्टा आवंटित करने का आरोप लगाया था.

इस साल फरवरी में, भाजपा ने राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को एक ज्ञापन सौंपा. जिसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 (ए) के तहत सोरेन को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी. राज्यपाल ने भाजपा की शिकायत को चुनाव आयोग को भेज दिया था और चुनाव आयोग ने मई में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता को नोटिस जारी किया था.

सरकार को नहीं था कोई खतरा

बता दें की, भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायक के रूप में अयोग्यता के मामले में कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए अपनी राय भेजने के साथ सीएम ने गुरुवार को भाजपा पर संवैधानिक अधिकारियों और जनता का घोर दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था.

सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दावा किया कि सरकार को तत्काल कोई खतरा नहीं है. एक मंत्री ने कहा था कि,

“सरकार तत्काल खतरे में नहीं है क्योंकि अगर वह सोरेन के खिलाफ जाती है तो वह राज्यपाल के आदेश के खिलाफ अपील करेगी. चुनाव आयोग द्वारा बैस को अयोग्यता मामले पर अपनी राय भेजने की खबर सामने आने के बाद सीएम अपने सलाहकारों और राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन के साथ उलझ गए.”

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