September 25, 2022
Hardik Patel : भाजपा में शामिल हए हार्दिक

Hardik Patel : भाजपा में शामिल हए हार्दिक

हार्दिक को भाजपा में आने से उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों से राहत जरूर मिल सकती है। इसमें उनके खिलाफ चल रहा राजद्रोह का मामला भी शामिल है।
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गुजरात में चुनाव के मद्देनजर सियासत अपने चरम पर है। पाटीदार समुदाय के बड़े नेता व कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल(Hardik Patel) के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा हैं। बता दें कि यह कदम राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले आया है, जो इसी साल दिसंबर में होने वाले हैं। कांग्रेस के लिए इस बार के हालात 2017 जैसे अनुकूल नहीं हैं कि जब पाटीदार आंदोलन चरम पर था |

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन में अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल (Hardik Patel) की बड़ी भूमिका मानी जाती थी। अल्पेश ठाकोर पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अब हार्दिक पटेल (Hardik Patel) का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस को आने वाले चुनाव में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

पिछले विधानसभा चुनाव में कैसा था कांग्रेस का प्रदर्शन

पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव दिसंबर 2017 में हुए थे | 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में बीजेपी ने 99 सीटें और कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी | 77 विधानसभा सीटें जीतने वाली कांग्रेस के सदस्यों की संख्या कम होकर 63 रह गई है वहीं 99 सीटें जीतने वाली भाजपा के सदस्यों की संख्या उपचुनावों में जीत के कारण बढ़कर 112 हो गयी है।

राज्य में ज्यादातर सीटों पर उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के कारण हुए हैं। वहीं 2017 के विपरीत कांग्रेस के पास इस बार कोई बड़ा चुनावी मुद्दा भी नहीं है।इसलिए आने वाले चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए आसान नहीं होंगे |

2017 के चुनाव में पूरे राज्य में हुए पाटीदारों के आंदोलन का भी कांग्रेस का फायदा हुआ था।

गुजरात चुनाव में पाटीदार समुदाय क्यों अहम ?

माना जाता है कि गुजरात की कुल 182 विधानसभा सीटों में से लगभग 70 सीटों पर पटेल वोटर निर्णायक हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पाटीदार आंदोलन की वजह इन सीटों पर नुकसान हुआ था। भारतीय जनता पार्टी पूरी ताक़त लगाने के बाद भी 100 सीटों का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाई थी। उसे सिर्फ 99 और कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं। भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान सौराष्ट्र क्षेत्र में हुआ था। जहां की 56 सीटों में से 32 पर कांग्रेस को जीत मिली थी। वहीं, भाजपा को महज 22 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के 36 विधायक पाटीदार समाज से चुनकर आये थे वहीं 2017 के इनकी संख्या घटकर 28 हो गई थी। जबकि कांग्रेस के 20 पाटीदार विधायक जीते थे। वर्तमान में गुजरात से बीजेपी के 44 विधायक, 6 सांसद और राज्यसभा में तीन सांसद पाटीदार समुदाय से हैं।

Hardik Patel के आने से भाजपा को कितना फायदा

गुजरात की राजनीति जानकार बताते हैं कि हार्दिक पटेल (Hardik Patel) के इस फैसले का भाजपा से ज्यादा हार्दिक को फायदा होगा। गुजरात का पाटीदार समुदाय लंबे समय से भाजपा के साथ है। 80-85% पाटीदार-पटेल के वोट भाजपा को मिलते रहे हैं। 2017 के चुनाव में अमानत आंदोलन और पाटीदरों पर लाठीचार्ज से नाराजगी के बाद भी पाटीदार वोटर पूरी तरह से भाजपा से अलग नहीं हुआ था। हालांकि, कुछ हिस्सों में उसकी नाराजगी का भाजपा को नुकसान जरूर हुआ। हार्दिक पटेल(Hardik Patel) के आने से भाजपा को पटेल-पाटीदार समाज में पुराना जनाधार वापस लौटने की उम्मीद है।

हार्दिक पटेल के भाजपा में आने से उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों से राहत जरूर मिल सकती है। इसमें उनके खिलाफ चल रहा राजद्रोह का मामला भी शामिल है।

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