September 26, 2022
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति Gotabaya Rajapaksa वापस लौट रहे अपने मुल्क

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति Gotabaya Rajapaksa वापस लौट रहे अपने मुल्क

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Gotabaya Rajapaksa: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa)अगले सप्ताह श्रीलंका लौट रहें हैं. बीते समय श्रीलंका में आंतरिक कलाह के चलते गोटाबाया राजपक्षे को अपना मुल्क छोड़ना पड़ा था. बता दें की, श्रीलंका की जनता इतनी उग्र हो गई थी की राष्ट्रपति भवन पर कब्ज़ा कर लिया  था.

अपने मुल्क वापस लौट रहे राजपक्षे

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) अगले सप्ताह द्वीप राष्ट्र लौटने के लिए तैयार हैं. पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे अपने विरोध के चलते मालदीव भाग गए थे. बता दें की, श्रीलंका की अर्थव्यस्था पुरी तरह से तबाह हो चुगी थी. जिसके चलते लोगों के पास खाने तक को कुछ नहीं बचा था.

इसके चलते जनता में आक्रोश था. और जनता ने राष्ट्रपति भवन पर कब्ज़ा कर लिया था. उनके देश छोड़ने के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को बनाया गया था. लेकिन अब चुनाव होने के बाद संविधान के तहत उनको राष्ट्रपति चुन लिया गया है.

डेली मिरर ने बुधवार को कहा कि रूस में श्रीलंका के पूर्व राजदूत उदयंगा वीरातुंगा, जो गोटाबाया से भी संबंधित हैं. उन्होंने संकेत दिया कि राजपक्षे 24 अगस्त को देश लौट आएंगे. राजपक्षे की वापसी पर एक सवाल के जवाब में वीरतुंगा ने कहा, “तारीख बदल सकती है. आज जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं. अगर वह बाद में तारीख बदल देता है तो मैं मदद नहीं कर सकता है.”

वीरतुंगा को फरवरी 2022 में किया गया था गिरफ्तार

बता दें की, श्रीलंका के पूर्व राजदूत उदयंगा वीरातुंगा को फरवरी 2022 में गिरफ्तार किया गया था और कई महीने बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया था. 2006, जब राजपक्षे ने रक्षा मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्य किया.

यह पूछे जाने पर कि क्या गोटबाया राजपक्षे फिर से राजनीति में शामिल होंगे. वीरतुंगा ने कहा कि वह एक चतुर राजनेता नहीं बल्कि एक चतुर अधिकारी थे. वीरतुंगा ने डेली मिरर के हवाले से कहा की,

“मुझे नहीं लगता कि हमारे लोगों को फिर से मूर्ख होना चाहिए। वह एक राजनेता के रूप में एक चतुर व्यक्ति नहीं है. वह एक चतुर सैन्य अधिकारी है. उनके पास महिंदा राजपक्षे जैसा कोई गुण नहीं है. इसलिए वह सब गलत हो गया. ”

वीरतुंगा ने आगे कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे देश की सेवा करेंगे. बता दें की, गोटाबाया राजपक्षे पिछले हफ्ते सिंगापुर से रवाना होने के बाद थाईलैंड पहुंचे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंकाई सरकार के अनुरोध के बाद उन्हें थाईलैंड में प्रवेश दिया गया था.

एक महीने सिंगापुर में थे राजपक्षे

मिली जानकारी के मुताबिक,  करीब एक महीने तक सिंगापुर में रहने के बाद उन्होंने पिछले गुरुवार को सिंगापुर छोड़ दिया था. पूर्व राष्ट्रपति को पिछले महीने मालदीव से सिंगापुर के चांगी हवाई अड्डे पर पहुंचने पर 14 दिनों का यात्रा पास जारी किया गया था और उन्हें वहां दो सप्ताह तक रहने की अनुमति दी गई थी.

थाईलैंड ने इस बात से इनकार किया है कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति ने देश में शरण मांगी है. थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे राजपक्षे से राजनीतिक शरण मांगने के इरादे से देश की यात्रा करने का अनुरोध मिला है.

डेली मिरर ने थाईलैंड मंत्रालय के प्रवक्ता तनी संग्रत के हवाले से कहा, “थाईलैंड ने राजनयिक पासपोर्ट पर राजपक्षे के प्रवेश में कोई समस्या नहीं देखी. जो उन्हें 90 दिनों तक रहने की अनुमति देगा.”

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