Global recession: आ रही है वैश्विक मंदी, विशेषज्ञों ने बजाया खतरे का अलार्म

Global recession: बढ़ती महंगाई को देखते हुए दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ा रहें हैं. एक तरफ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था कहे जाने वाले चीन का हाल बुरा है. दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सुस्ती है.  दुनिया बाहर में चल रहे इन हालातों पर विशेषज्ञों ने अपनी चिंता जाहिर की है. और वैश्विक मंदी आने के आसार बताए हैं.

क्या सच में आ रहा Global recession

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, विशेषज्ञों द्वारा दी गई वैश्विक मंदी (Global recession) की चेतावनी दिन पर दिन जोर से पकड़ रही है. पिछले सप्ताह के दौरान, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रमुख से लेकर अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन (Paul Krugman) तक ने वैश्विक मंदी की संभावना जाहिर ही है.

स्विट्जरलैंड स्थित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा बुधवार को जारी एक सर्वे में 22 प्रमुख निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के अर्थशास्त्रियों में 10 में से सात ने कहा कि उनका मानना ​​​​है कि वैश्विक मंदी कम (Global recession) से कम 2023 संभावित रूप से आ जाएगी.

इस बीच फ्लोरिडा स्थित एक शोध फर्म  नेड डेविस रिसर्च, जो अपने वैश्विक मंदी संभाव्यता मॉडल (Global Recession Probability Model) के लिए जानी जाती है. उन्होंने अगले साल वैश्विक मंदी की संभावना को 98.1 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. जो कि 2020 के COVID-19 महामारी से संबंधित मंदी और वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद से सबसे अधिक है. जो वैश्विक मंदी 2008-2009 में आई ये आंकड़ा उससे भी ज्यादा है.

वैश्विक मंदी के यह हैं सबसे बड़े कारण

बता दें की, रूस-यूक्रेन का युद्ध, चीन की जीरो कोविड नीती और बढ़ती हुई मुद्रास्फीति वैश्विक मंदी के ये कारण है. संयुक्त राज्य फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को इतनी आक्रामक रूप से बढ़ाया गया है की,  दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी अब मंदी की ओर इशारा कर रही है.

ऐतिहासिक रूप से अमेरिका और अन्य केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक विकास को गंभीर झटका दिए बिना दरों को बढ़ाने के लिए बहुत सोचा लेकिन उनके लिए ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है. जेरेमी सीगल जैसे प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों सहित आलोचकों ने यूएस फेड पर इस बार दरें बढ़ाने के लिए कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

अर्थव्यवस्था के लिए सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) की उम्मीद रखने के बावजूद यूएस फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने पिछले हफ्ते स्वीकार किया कि केंद्रीय बैंक के अधिकारी नहीं जानते कि क्या मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के उनके प्रयासों से मंदी आएगी.

बढ़ती हुई ब्याज दरों से पड़ रहा है ज्यादा असर

बता दें की, ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहता है तो मंदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है. विश्‍व बैंक (World Bank) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात की आशंका जाहिर की है.

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Bank) महंगाई पर काबू पाने के लिए जिस हिसाब से दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं, उसे देखते हुए वर्ल्‍ड बैंक ने अनुमान लगाया है कि इसमें अतिरिक्‍त 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है.  वैसे बता दें की, कोरोना वायरस ने पहले से ही सब कुछ तबाह कर रखा था. लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अब कई देश भयंकर गरीबी से जूझ रहे हैं.

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