भारत की लेखिका गीतांजलि श्री के हिन्दी उपन्यास ‘रेत समाधि’ (Tomb of Sand) को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज़(Booker Prize) मिला है | ‘रेत समाधि’ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाला किसी भी भारतीय भाषा का पहला उपन्यास बन गया है | उनके उपन्यास को डेजी रॉकवेल ने अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है | इस पुरस्कार राशि के रूप में उन्हें 50,000 पाउंड भी मिले है | यह उपन्यास दुनिया की उन 13 पुस्तकों में शामिल था, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लिस्ट में शामिल किया गया था। टॉम्ब ऑफ सैंड बुकर जीतने वाली हिंदी भाषा की पहली किताब है। साथ ही किसी भी भारतीय भाषा में अवॉर्ड जीतने वाली पहली किताब भी है।

गीतांजलि श्री कई लघु कथाओं और उपन्यासों की लेखिका हैं. उनके 2000 के उपन्यास माई को 2001 में क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए चुना गया था |

क्या है इस किताब में ?

इस उपन्यास में 80 वर्षीय बुजुर्ग विधवा की कहानी है, जो 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद अपने पति को खो देती है। इसके बाद वह गहरे अवसाद में चली जाती है। काफी जद्दोजहद के बाद वह अपने अवसाद पर काबू पाती है और विभाजन के दौरान पीछे छूटे अतीत का सामना करने के लिए पाकिस्तान जाने का फैसला करती है।

बुकर पुरस्कार जीतने के बाद गीतांजलि श्री की पहली प्रतिक्रिया

By Satyam

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