September 25, 2022
बलूचिस्तान में फर्जी मुठभेडों के खिलाफ London में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर हुआ जमकर विरोध प्रदर्शन

बलूचिस्तान में फर्जी मुठभेडों के खिलाफ London में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर हुआ जमकर विरोध प्रदर्शन

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लंदन (London) के पाक दूतावास के बाहर जनता ने जमकर विरोध प्रदेश किया. यह प्रदर्शन जियारत जिले में फर्जी मुठभेड़ और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.

प्रदर्शनकारियों ने कही ये बातें

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, लंदन (London) में हो रहे पाकिस्तान के विरोध पर लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है. दूतावास के सामने खड़े कई प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर लिखा था, “बलूचिस्तान में मानवाधिकार बहाल करो. बलूचिस्तान पर कब्जे का अंत” और बलूचिस्तान में नरसंहार बंद करो.”

उन्होंने बलूचिस्तान के लिए स्वतंत्रता की मांग करते हुए नारे लगाए और कहा कि पाकिस्तानी सेना बलूच नागरिकों का हत्यारा है. बता दें की, बलूच नेशनल मूवमेंट द्वारा विरोध का आह्वान किया गया था जिसमें पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान पर अपना कब्जा समाप्त करने की मांग की गई थी.

मिली जानकारी के मुताबिक, लापता व्यक्तियों और फर्जी मुठभेड़ों की कई मीडिया रिपोर्टों के बीच, देश के साथ-साथ विदेशों में भी लापता व्यक्तियों की हत्या के खिलाफ विरोध तेज हो गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में एक कानूनी और संवैधानिक सरकार होने के बावजूद लोगों को अवैध रूप से और जबरदस्ती बुलाया जाता है. और फिर फर्जी मुठभेड़ों में मार दिया जाता है.

दूरदराज के इलाकों में पाए जा रहे शव

कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि बेगुनाह बलूच फर्जी मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं और उनके क्षत-विक्षत शव दूरदराज के इलाकों में पाए जाते हैं. हाल ही में जियारत में फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए नौ लोगों को पहले जबरदस्ती गायब कराया गया.

मामले ने तूल तब पकड़ा जब, पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ने कुछ दिन पहले कहा था कि देश की सेना ने एक सैन्य अभियान में पांच आतंकवादियों को मार गिराया है. ऐसा बताया जा रहा की, इससे पहले, पाकिस्तानी सेना ने 25 जून को उत्तरी वजीरिस्तान में एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन (IBO) के दौरान चार आतंकवादियों को मार गिराया था.

जबरन गायब होने का इस्तेमाल पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा उन लोगों को आतंकित करने के लिए किया जाता है जो देश की सर्वशक्तिमान सेना की स्थापना पर सवाल उठाते हैं.

रिपोर्ट बताती है कि यह एक ऐसा अपराध है जिसका इस्तेमाल अक्सर अधिकारियों द्वारा बिना किसी गिरफ्तारी वारंट, आरोप या अभियोजन के उपद्रव माने जाने वाले लोगों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है.

यह लोग होते हैं अपहरण का शिकार

अधिकारिक जानकारीकी माने तो, इन अपहरणों के शिकार, जो अक्सर युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग होते हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल संगठन का कहना है कि, अधिकारी पीड़ितों को सड़कों या उनके घरों से पकड़ लेते हैं. और बाद में यह बताने से इनकार करते हैं कि वे कहां हैं. बलूचिस्तान में 2000 के दशक की शुरुआत से जबरदस्ती अपहरण किए जा रहे हैं.

छात्र अक्सर इन अपहरणों का सबसे अधिक लक्षित वर्ग होते हैं. पीड़ितों में कई राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार, शिक्षक, डॉक्टर, कवि और वकील भी शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 20 वर्षों में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और पाकिस्तानी सेना के जवानों द्वारा हजारों बलूच लोगों का अपहरण किया गया है. कई पीड़ितों को मार दिया गया और फेंक दिया गया और ऐसा माना जाता है कि उनमें से कई अभी भी पाकिस्तानी यातना कक्षों में बंद हैं.

 

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