September 25, 2022
Emergency: श्रीलंका में स्थिति देखते हुए एक महीने के लिए बढ़ाया गया आपातकाल

Emergency: श्रीलंका में स्थिति देखते हुए एक महीने के लिए बढ़ाया गया आपातकाल

Spread the love

Emergency: श्रीलंका में राजनितिक उथल पुथल मची हुई है. श्रीलंका की संसद ने बुधवार को जुलाई में पहले लगाए गए आपातकाल (Emergency) की घोषणा को मंजूरी देने के लिए मतदान किया. अब इस आपातकाल को श्रीलंका में  विस्तारित करने की अनुमति मिली.

एक महीने के लिए श्रीलंका में आपातकाल

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका में हालात देखते हुए है एक महीने का आपातकाल (Emergency) बढ़ा दिया गया है. आज हुए मतदान में, 120 श्रीलंकाई सांसदों ने आपातकालीन नियम लागू करने के लिए मतदान किया और 63 ने इसके खिलाफ मतदान किया.

जानकारी के लिए बता दें की, तत्कालीन कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे द्वारा 18 जुलाई से सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश के तहत सार्वजनिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा और समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति और सेवाओं के रखरखाव के लिए आपातकाल की स्थिति घोषित की गई थी.

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि अप्रूव के 14 दिनों के भीतर संसद का अनुमोदन प्राप्त नहीं किया जाता है. तो यह समाप्त हो जाएगा. विक्रमसिंघे को 20 जुलाई को संसदीय वोट में दक्षिण एशियाई देश के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था और एक दिन बाद शपथ ली गई थी.

प्रदर्शनकारियों की भीड़ हो गई थी उग्र

मिली जानकारी के मुताबिक, 73 वर्षीय श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के 9 जुलाई को उनके आवास पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने धावा बोल दिया था. बता दें की श्रीलंका में अभी भी हालात बहुत ही नाज़ुक हैं. श्रीलंका में फैली अव्यवस्था ने सब कुछ तबाह करने की कगार पर पहुंचा दिया है.

बता दें की, श्रीलंका में सत्ता में बैठे लोगों पर भ्रष्टाचार और ऊँचे पदों पर अपने परिवार के लोगों को बैठालने के आरोप लगे थे. और ऐसा माना जा रहा था की श्रीलंका पर एक परिवार का एक क्षत्र राज है जिसकी वजह से श्रीलंका की ये हालात हुई है.

श्रीलंका की स्थिति दिन पर दिन चिंता का विषय बनती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र ने भी श्रीलंका की इस स्थिति पर चिंता जताई थी. गोटाबाया राजपक्षे के श्रीलंका छोड़ कर भागने के बाद भी वहां की जनता शांत नहीं हुई. कार्यवाहक राष्ट्रपति पर भी जनता का गुस्सा उतना ही उग्र है.

क्यों है श्रीलंका चितर-बितर

श्रीलंका में जो कुछ भी हो रहा है उसका जिम्मेदार कोरोना महामारी को माना जा रहा है. लेकिन जनता वहाँ की सरकार को ही दोषी मान रही है. जानकारी के लिए बता दें की, श्रीलंका में फरवरी से ही डीजल की भी किल्लत चल रही है. जिसके कारण रोजाना घंटों बिजली कटौती होती है. वर्तमान में, श्रीलंका तीव्र भोजन और बिजली की कमी से जूझ रहा है. जिससे देश अपने पड़ोसियों से मदद लेने के लिए मजबूर हो रहा है.

वैसे तो COVID-19 महामारी के दौरान पर्यटन पर रोक के कारण विदेशी मुद्रा की कमी को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. देश पर्याप्त ईंधन और गैस नहीं खरीद पा रहा है. जबकि लोग बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं. हालात ये हैं की स्कूल कॉलेज पर आज भी ताला लटक रहा है.

इसके साथ ही सबसे बड़ी समस्या है भोजन की. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका में आज भी 60 लाख से ज्यादा परिवार ऐसे हैं जिनको ये नहीं पता की उनका अगला भोजन कहाँ से आएगा. आएगा भी या उनको और उनके परिवार को सिर्फ पानी पीकर ही रात गुज़ारनी पड़ेगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published.