Eknath Shinde: एकनाथ शिंदे बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, ऐसा रहा है उनका जीवन

Eknath Shinde: सभी विवादों को दर किनार करते हुए महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में शिवसेना (Shivsena) नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने शपथ (Oath) ले ली है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने एकनाथ शिंदे को सीएम पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है. शपथ ग्रहण समारोह के ठीक बाद शिंदे ने अपने ट्विटर हैंडल की प्रोफाइल तस्वीर को बाला साहेब ठाकरे के साथ की एक फोटो से बदल दिया है.

ऑटो चालक से मुख्यमंत्री तक का सफ़र

बता दें की महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा माना जा रहा था की, शिवसेना की सरकार गिरने के बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस बनेंगे लेकिन बागी विधायक के नाम से मशहूर हो रहे एकनाथ शिंदे अब महारष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुगें हैं. हालाँकि, इस ख़बर ने सभी को चौका दिया था. शिंदे का जन्म 9 फरवरी 1964 को सतारा में हुआ था. कम उम्र में ही वे मुंबई से सटे हुए ठाणे आ गए और 11वीं तक की शिक्षा मंगला हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज से पूरी की है. परिवार को सहारा देने के लिए उन्हें पढ़ाई छोड़कर छोटे-मोटे काम शुरू कर दिए.

इस दौरान उन्होंने आजीविका के लिए ऑटो-रिक्शा भी चलाया. बता दें की एकनाथ शिंदे का मुख्यमंत्री बनने का सफ़र बहुत ही कठिनायों भरा रहा है. कभी मुंबई से सटे ठाणे (Thane) शहर में ऑटो चालक के रूप में काम करने वाले 58 वर्षीय एकनाथ शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में ठाणे-पालघर क्षेत्र में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनायी.

मुश्किलों की वजह से शिंदे ने जो पढ़ाई छोड़ी थी उसको उन्होंने मंत्री बनने के बाद पूरा किया. एकनाथ शिंदे ने वाशवंतराव चव्हाण मुक्त विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने 2020 में मराठी और राजनीति विषयों में बीए (B.A) किया.

इस तरह शुरू हुआ शिंदे का राजनीतिक सफ़र

एकनाथ शिंदे (Ekanth Shinde) 1997 ने चुनावी राजनीति में कदम रखा. 1997 के ठाणे (Thane) नगर निगम चुनाव में आनंद दिघे ने शिंदे को पार्षद को टिकट दिलवाया. शिंदे ये चुनाव जीत गए. 2001 में नगर निगम सदन में विपक्ष के नेता बने और 2002 में दूसरी बार निगम पार्षद का चुनाव जीते. ऐसे ही जीत का सिलसिला चलता रहा. शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे चार बार विधायक भी रह चुगे हैं.

बता दें की, एक समय ऐसा भी आया जब शिंदे निजी जीवन में दुखी हुए. उनका परिवार बिखर गया था. 2 जून 2000 को एकनाथ के 11 वर्षीय बेटे दीपेश और 7 साल की बेटी शुभदा का निधन हो गया. इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और वापसी की. हालही में महारष्ट्र की राजनीती में भयंकर भूचाल आ गया था. बता दें की, शिंदे कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं थे. बताया जाता है कि इसी मुद्दे पर शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच दूरियां बढ़ने लगी. और शिंदे ने पार्टी से अलग होने का फ़ैसला कर लिया. BJP का समर्थन पाकर  आज वो महाराष्ट्र की सत्ता के अधिकारी है.

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