अमेरिकी दवाब के बावजूद OPEC देशों ने तेल उत्पादन में की प्रतिदिन 2 लाख बैरल की कटौती

OPEC: दुनिया के कच्चा तेल उत्पादन करने वाले देशों का समूह ओपेक (OPEC) ने कोरोनो वायरस महामारी के बाद से तेल उत्पादन में अपनी सबसे बड़ी कटौती पर सहमति व्यक्त की है. संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य लोगों के दबाव के बावजूद भी ओपेक देश (OPEC) अपने फैसले पर टिके हुए है.

ख़बरों की माने तो ऐसा भी बताया जा रहा है कि रूस ने भी तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक के साथ मिलकर इस फैसले पर सहमति जतायी है. ओपेक देशों के साथ रूस को जोड़कर यह समूह OPEC+ कहलाता है.

OPEC+ ने दिया दुनिया को झटका

Aljazeera से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका समेत पश्चिमी देश पहले से ही ओपेक देशों से तेल के उत्पादन को बढ़ाने का अनुरोध करते रहे हैं. लेकिन अब जब OPEC+ ने कच्चे तेल के उत्पादन में रोजाना 2 मिलियन बैरल की कटौती की बात कही है तब से सभी देशों में खलबली मची हुई है.

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने सऊदी अरब का दौरा किया था. जहाँ उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक की थी. लेकिन बताया जा रहा है की उनकी बैठक कुछ काम नहीं आई. सऊदी ने तेल उत्पादन बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है.

अमेरिका की तरह से ऐसी बाते भी सामने आ रहीं थी की, ये रूस और सऊदी की मिली भगत है. लेकिन इस अफवाह पर अब तेल उत्पादन में कटौती करने के बाद ओपेक के वास्तविक नेता सऊदी अरब ने सफाई दी है.  सऊदी ने कहा कि, “उत्पादन में 20 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती पश्चिम में बढ़ती ब्याज दरों और कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था का जवाब देने के लिए आवश्यक थी.”

क्यों की जा रही तेल में कटौती

बता दें की, सऊदी अरब तो शुरुवात से अपने तीखे रुक दिखा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति से हुई बैठक के बाद भी सऊदी अरब अपनी बात पर अड़ा है. सऊदी अरब का कहना है की,  पश्चिम देश ओपेक+ समूह की आलोचना धन के अहंकार में करते हैं. रायटर्स की माने तो यह फैसला ग्लोबल इकॉनमी को मद्दे नज़र रखते हुए लिया गया है. हालाँकि, बताया जा रहा है, उत्पादन में कटौती से तेल के दाम और उससे बनने वाले पेट्रोल की कीमत पर विशेष असर नहीं पड़ेगा.

अमेरिका के वाइट हाउस की तरफ से अधिकारिक बयान सामने आया है की,

“राष्ट्रपति जो बाइडेन यह फैसला लेंगे कि क्या कीमतों को कम करने के लिए और अधिक मात्रा में स्ट्रैटजिक ऑयल स्टॉक को बाजार में जारी किया जाएगा या नहीं. राष्ट्रपति ओपेक + के उत्पादन कोटा में कटौती के अदूरदर्शी फैसले से निराश हैं. जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के निरंतर नकारात्मक प्रभाव से निपट रही है.”

OPEC देशों का 2020 के बाद ये सबसे बड़ी कटौती

यह 2020 के बाद से पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और उसके सहयोगियों द्वारा की गई सबसे बड़ी उत्पादन में कमी है. बताया जा रहा है की कई देश तेल के कम उत्पादन के चलते महंगाई का सामना कर रहें हैं.

उधर रूस-यूक्रेन के युद्ध के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जो मंदी आने के आसार बताए जा रहें हैं कई देश उससे भी घबराए हुए हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था चीन में जीरो कोविड नीती के चलते कई फैक्ट्री ठप पड़ी हैं.

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