Demonetisation: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को ठहराया सही

Demonetisation: न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने कहा की, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया था कि 8 नवंबर, 2016 को 500 रुपये और 1,000 रुपये की के करेंसी नोटों को बंद (Demonetisation) करने का केंद्र का फैसला कानूनी रूप से वैध था. और हर कसौटी पर खरा उतरता है.

Demonetisation को कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोटबंदी पर केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया और कहा कि 2016 का कदम वैध है. न्यायमूर्ति एसए नज़ीर की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र की निर्णय (Demonetisation) लेने की प्रक्रिया अकेले की नहीं हो सकती है.

कोर्ट का कहना है की इस फैसले पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के बीच परामर्श हुआ था. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि, “8 नवंबर, 2016 की अधिसूचना, जिसमें 1,000 रुपये और 500 रुपये की करेंसी नोटों को बंद (Demonetisation) करने के निर्णय की घोषणा की गई थी.”

कोर्ट की बेंच में इतने लोग शामिल थे

बेंच, जिसमें जस्टिस बीवी नागरथना, बीआर गवई, एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन भी शामिल थे उन्होंने कहा की, “8 नवंबर, 2016 की अधिसूचना वैध है और आनुपातिकता के परीक्षण को संतुष्ट करती है.”

Demonetisation: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को ठहराया सही
Demonetisation: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को ठहराया सही

उन्होंने आगे कहा कि, “यह प्रासंगिक नहीं है कि निर्णय के पीछे का उद्देश्य था. न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, हालांकि, आरबीआई अधिनियम की धारा 26 (2) के तहत केंद्र की शक्तियों के बिंदु पर बहुमत के फैसले  पर मुहर लगाई है.”

58 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी अदालत

बताया जा रहा है की, शीर्ष अदालत नोटबंदी (Demonetisation) को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. अदालत ने कहा कि 2016 से नोटबंदी (Demonetisation) की घोषणा की अधिसूचना को निर्णय लेने की प्रक्रिया के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है.

शीर्ष अदालत ने 7 दिसंबर को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि, आरबीआई के वकील और याचिकाकर्ताओं के वकीलों, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम और श्याम दीवान शामिल थे.

केंद्र सरकार ने सोच समझकर लिया था फैसला

17 नवंबर को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 2016 में केंद्र सरकार का नोटबंदी (Demonetisation) का निर्णय एक सुविचारित निर्णय था. नकली धन, आतंकवाद के वित्तपोषण, काले धन के खतरे से निपटने के लिए एक बड़ी रणनीति का एक हिस्सा था.

और कर चोरी को रोकना भी इसका बड़ा उद्देश्य था. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपने हलफनामे में कहा कि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था और यह वही था जिसने केंद्र सरकार को उच्च मूल्य के करेंसी नोटों के नोटबंदी (Demonetisation) के निर्णय की सिफारिश की थी.

2016 की नोटबंदी की कवायद पर फिर से विचार करने के शीर्ष अदालत के प्रयास का विरोध करते हुए सरकार ने कहा था कि अदालत ऐसे मामले का फैसला नहीं कर सकती है. हालाँकि, अब कोर्ट ने इस नोटबंदी को सही ठहराया है.

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